हॉस्टल से गायब 3 नाबालिग मथुरा में मिले, सकुशल घर लौटे; बच्चों के बड़े आरोप
जानकी बाई हॉस्टल से करीब 30 घंटे पहले लापता हुए तीन नाबालिग बच्चों के मिलने से परिजनों ने राहत की सांस ली है। तीनों बच्चे मथुरा में सकुशल मिले हैं। बच्चों के वापस एमपी के सागर संभाग के टीकमगढ़ जिले के खरगापुर पहुंचने और परिजनों से मिलने के बाद परिवार के लोगों के चेहरे पर फिर से खुशी लौट आई। जानकारी के मुताबिक, तीनों बच्चों के लापता होने के बाद से ही परिजन लगातार उनकी तलाश में जुटे थे। करीब 30 घंटे तक बच्चों का कोई सुराग नहीं मिलने से परिवार की चिंता बढ़ती जा रही थी। इसी बीच बच्चों के मथुरा में मिलने की सूचना सामने आई, जिसके बाद परिजनों ने राहत की सांस ली।
बताया जा रहा है कि खरगापुर पहुंचने के बाद पुलिस ने तीनों बच्चों से पूछताछ की। पूछताछ के बाद बच्चों को उनके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया। इस दौरान बच्चों ने परिजनों को हॉस्टल छोड़कर जाने की अपनी वजह बताई। बच्चों के मुताबिक, वे हॉस्टल में कथित तौर पर मारपीट और काम करवाए जाने से परेशान थे। उनका आरोप है कि हॉस्टल संचालक रमेश अहिरवार और उसके पुत्र द्वारा उनके साथ कथित मारपीट की जाती थी और उनसे काम करवाया जाता था। बच्चों ने परिजनों को बताया कि इसी वजह से वे डर गए थे और हॉस्टल छोड़कर चले गए।
हालांकि, बच्चों की ओर से लगाए गए इन आरोपों की अभी पुलिस जांच के जरिए पुष्टि होना बाकी है। पुलिस बच्चों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पूरे मामले की पड़ताल कर रही है। बच्चों ने यह भी बताया कि खरगापुर से निकलने के बाद जब वे रेलवे स्टेशन के आसपास थे, तब उनकी मुलाकात हॉस्टल संचालक रमेश अहिरवार से हुई थी। बच्चों के मुताबिक, उस समय संचालक ने उनसे कुछ नहीं कहा।
अब पुलिस हॉस्टल की व्यवस्था, संचालक की भूमिका और बच्चों द्वारा लगाए गए मारपीट व काम करवाने के आरोपों की जांच कर रही है। साथ ही बच्चों के मथुरा पहुंचने और वहां तक जाने के पूरे घटनाक्रम को भी समझने का प्रयास किया जा रहा है। फिलहाल तीनों बच्चे सुरक्षित हैं और अपने परिजनों के साथ हैं। बच्चों के सकुशल मिलने से परिवार ने राहत की सांस ली है, लेकिन उनके द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद हॉस्टल संचालन और बच्चों की सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। अब पुलिस जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर साफ होगी।