त्रिशूल धाम मंदिर की जमीन को लेकर वि वाद, ग्रामीणों का प्रदर्शन, नामांतरण रोकने की मांग
प्रसिद्ध त्रिशूल धाम मंदिर को लेकर जमीन विवाद सामने आया है। शासकीय भूमि के कथित विक्रय और मंदिर को लेकर धमकी दिए जाने के आरोपों के बाद ग्रामीणों और श्रद्धालुओं में नाराजगी है। गुरुवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण और मंदिर समिति के सदस्य तहसील कार्यालय पहुंचे और तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर भूमि के नामांतरण की प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि एमपी के सागर संभाग के दमोह जिले के पथरिया स्थित मौजा लखरौनी के खसरा नंबर 77, रकबा करीब 1.20 हेक्टेयर भूमि पूर्व में राजस्व अभिलेखों में शासकीय भूमि के रूप में दर्ज होने की बात सामने आई है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस जमीन का नियमों के विपरीत विक्रय किया गया है। इसी को लेकर उन्होंने भूमि के विक्रय और नामांतरण की प्रक्रिया की जांच कराने की मांग प्रशासन के सामने रखी है।
ग्रामीणों और त्रिशूल धाम मंदिर समिति के सदस्यों का आरोप है कि भूमि की खरीद-फरोख्त के बाद मंदिर को हटाने या तोड़ने की धमकियां दी जा रही हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि मंदिर से क्षेत्र के लोगों की धार्मिक आस्था जुड़ी हुई है और किसी भी कार्रवाई से पहले प्रशासन को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करनी चाहिए। समिति की ओर से बताया गया कि भूमि के क्रेता से संबंधित मूल बैनामा दस्तावेज अभी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं। हालांकि, स्थानीय पटवारी के माध्यम से ऑनलाइन राजस्व रिकॉर्ड में भूमि के विक्रय की जानकारी सामने आने का दावा किया गया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मूल राजस्व अभिलेख और दस्तावेजों की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
ज्ञापन में ग्रामीणों ने मांग की कि जांच पूरी होने तक संबंधित भूमि के नामांतरण पर तत्काल रोक लगाई जाए। साथ ही यदि जांच में शासकीय भूमि के नियम विरुद्ध विक्रय की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों और मंदिर समिति ने चेतावनी दी है कि मांगों पर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो व्यापक जन आंदोलन किया जाएगा। वहीं तहसीलदार दीपा चतुर्वेदी ने कहा कि खसरा नंबर 77 का विक्रय पत्र निष्पादित हुआ है। ग्रामीण इसे पट्टे की जमीन बता रहे हैं। मामले की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाएगी। अब पूरे मामले की जांच और राजस्व अभिलेखों से यह स्पष्ट होगा कि संबंधित भूमि की वास्तविक कानूनी स्थिति क्या है