गर्भवती महिला का गर्भपात; SIT जांच के बाद 4 पुलिसकर्मियों पर FIR
एमपी के बालाघाट जिले के किरनापुर थाने में महिला और उसके पति से कथित दुर्व्यवहार और पुलिस कार्रवाई का मामला एक बार फिर चर्चा में है। अब महिला की तबीयत बिगड़ने और गर्भपात की प्रक्रिया कराए जाने के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है। परिवार ने महिला की हालत के लिए थाने में कथित मारपीट और दुर्व्यवहार को जिम्मेदार बताया है, जबकि पुलिस की एसआईटी जांच में मारपीट की पुष्टि नहीं होने की बात सामने आई है।
वहीं, जांच में पुलिस कार्रवाई के दौरान कई प्रक्रियात्मक अनियमितताएं मिलने के बाद चार पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज की गई है। मामला सावित्री चौधरी और उनके पति कैलाश चौधरी से जुड़ा है। परिजनों के मुताबिक, 22 सितंबर की शाम सावित्री को पेट में दर्द और रक्तस्राव की शिकायत के बाद जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। जांच के दौरान गर्भस्थ शिशु की धड़कन नहीं मिलने की बात परिवार की ओर से कही गई। इसके बाद अधिक रक्तस्राव के बीच डॉक्टरों की सलाह पर गर्भपात की प्रक्रिया कराई गई।
परिजनों का आरोप है कि किरनापुर थाने में कथित मारपीट और दुर्व्यवहार के बाद महिला की तबीयत बिगड़ी थी। हालांकि, गर्भपात और थाने में हुई कथित घटना के बीच चिकित्सकीय रूप से सीधा संबंध है या नहीं, यह फिलहाल स्पष्ट नहीं है। इसके लिए मेडिकल रिपोर्ट और जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे। इधर, पुलिस की एसआईटी ने मामले की जांच में 49 से अधिक लोगों के बयान, मेडिकल, तकनीकी और दस्तावेजी साक्ष्यों की पड़ताल की। रिपोर्ट के आधार पर चार पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। जांच में महिला को पर्याप्त कानूनी आधार के बिना थाने में रखने, रोजनामचा में देरी और सूर्यास्त के बाद गिरफ्तारी की प्रक्रिया में नियमों का पालन नहीं करने जैसी अनियमितताओं का उल्लेख है।
पुलिस के मुताबिक, महिला और उसके पति को डराने-धमकाने और दबाव डालकर संस्वीकृति कराने से जुड़े तथ्य भी जांच में सामने आए हैं। हालांकि, महिला के साथ मारपीट की पुष्टि एसआईटी जांच में नहीं होने की बात पुलिस की ओर से कही गई है। अब महिला के गर्भपात के चिकित्सकीय कारण और पूरे घटनाक्रम के बीच संबंध की जांच अहम होगी। फिलहाल मामले में पुलिस की एफआईआर के साथ मेडिकल रिपोर्ट और आगे की विवेचना पर नजर है।