Four sisters learned to use sticks in the Akhara, are unable to go to Bhutan due to lack of money
एमपी के बैतूल में लॉकडाउन के दौरान घर में बैठे-बैठे बोर होने पर जब चाचा ने अखाड़े में आकर कुछ सीखने का बोला तो चारों बहनों ने बिना देर किए अखाड़े पहुंचकर लॉकडाउन के दौरान लाठी चलाना सीखा। देखते ही देखते चारों बहनें लाठी चलाने में एक्सपर्ट बन गई और देखते ही देखते प्रतियोगिताओं में उतरकर मेडल भी जितने लगी। अब चारों बहनों खुशी, रिया,रुचि और सिया का भूटान में आयोजित होने वाले दक्षिण एशिया लाठी स्पर्धा के लिए चयन हुआ है। लेकिन आर्थिक तंगी के कारण वह इसमें शामिल नहीं हो पा रही है। यह प्रतियोगिता भूटान में 4 से 6 अगस्त तक आयोजित होना है। खुशी के पिता विनोद भोंडे ने बताया कि चारों बहनों का चयन भूटान में होने वाले लाठी प्रतियोगिता के लिए हुआ है। भूटान जाने एवं अन्य खर्च मिलकर 20 हजार रुपए आ रहा है। मेरी आरती की स्थिति ठीक नहीं है जिसके कारण में चाह कर भी उन्हें नहीं भेज पा रहा हूं। चारों बहनों लाठी खेलने उज्जैन ग्वालियर हरिद्वार सहित देश के कई शहरों में जा चुकी है और सिल्वर और गोल्ड मेडल जीत चुकी है। खुशी की मां कमला भोंडे ने बताया कि चारों बहनें बहुत अच्छा लाठी चलती है। कई प्रतियोगिता में मेडल भी जीत चुकी है। चारों बहनें देश के लिए खेलना चाहती है। लेकिन आर्थिक तंगी के कारण और उन्हें सुविधा नहीं दे पा रहे हैं आर्थिक तंगी के कारण कई प्रतियोगिता में भाग नहीं ले पाती।
कोच विनोद बुंदेले ने बताया कि लॉकडाउन में जब लोग घर से बाहर निकलने से घबराते थे, तब ये बच्चियां यहां प्रैक्टिस करते थे। चारों बहनों का भूटान में होने वाले दक्षिण एशिया लाठी प्रतियोगिता के लिए चयन हुआ है,लेकिन आर्थिक तंगी के कारण शामिल नहीं हो पा रही है। क्योंकि इनके पिता सैलून में काम करते है। वहीं आर्थिक तंगी के कारण कई खिलाड़ी बड़ी प्रतियोगिता में भाग नहीं ले पाते। पूरा जीवन पहलवानी, अखाड़े में लगा देने वाले 52 साल के विनोद व्यायाम शालाओं में युवकों को मलखंभ से लेकर लाठी चलाना, मुग्दल घुमाना, तलवार बाजी तक की शिक्षा देते हैं। लॉकडाउन लगा तो उन्होंने व्यायाम शाला के इन्हीं बच्चों को लाठी चलाने का हुनर सिखाने का संकल्प ले लिया। उन्होंने साल 2020 में बच्चों के साथ जमकर मेहनत की। इसका नतीजा यह हुआ कि उनके सिखाए खिलाड़ी अब जगह-जगह अपनी जीत का परचम लहरा रहे हैं।