श्रीराम के परम भक्त ने त्यागा शरीर, आखिर कौन थे सियाराम बाबा, अंतिम दर्शन के लिए उमड़ रही भीड़
देश के ख्याति प्राप्त संत श्री सियाराम बाबा का 11 दिसंबर को देवलोक गमन हुआ. उन्होंने ग्यारस के दिन नर्मदा तट पर भट्यान आश्रम में सुबह करीब साढ़े छह बजे शरीर त्यागा. सियाराम बाबा पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ चल रहे थे. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश के बाद डॉक्टर और स्वास्थ्य विभाग की टीम 24 घंटे उनकी निगरानी कर रही थी. बताया जाता है कि उनकी आयु 100 वर्ष के करीब थी. वे मात्र 10 रुपये दान में लेते थे. सियाराम बाबा दिन भर रामायण का पाठ करते थे. उनके शरीर त्यागने के बाद पूरे प्रदेश में शोक की लहर फैल गई है. आश्रम पर सैकड़ों भक्तों की भीड़ जुटी है.
बता दें, सियाराम बाबा पूरे विश्व में विख्यात थे. उनके भक्त पूरे विश्व में फैले हुए हैं. उनके दर्शनों के लिए लोग सालभर उनके आश्रम आया करते थे. उनके निधन से चारों ओर शोक व्याप्त है. हजारों भक्तों की भीड़ आश्रम की ओर रवाना हो गई है. ये सभी भक्त उनके अंतिम दर्शन करेंगे और उनकी अंतिम यात्रा में शामिल होंगे.
बाबा गुजरात के काठियावाड़ के रहने वाले थे और मुंबई के एक स्कूल से उन्होंने कक्षा 11 वीं तक पढ़ाई की है. गत 70 वर्षों से बाबा खरगोन में नर्मदा नदी के तट पर निवास कर रहे थे. हालांकि, उन्होंने अपने और परिवार के बारे में ज्यादा कुछ नहीं बताया. पूरा जीवन बाबा सन्यासी रहे.
सेवादारों के अनुसार, सियाराम बाबा का असली नाम कोई नहीं जानता. पहली बार उनके मुख से सियाराम शब्द निकला था और तभी से लोग उन्हें इसी नाम से पुकारने लगे. सेवादार संतोष पटेल बताते है कि, साल 1955 में बाबा गांव आए थे. तब उनकी उम्र करीब 22 वर्ष थी. यहां बरगद के वृक्ष के नीचे एक पैर पर खड़े रहकर 12 वर्षों तक खड़ेश्वरी तपस्या की. इस दौरान वे मौन साधन में लीन रहे. भोजन में सिर्फ नीम के पत्ते खाते थे