Sagar - Police picked up the junkyard thinking it was real Mansingh, when the secret was revealed there was panic.
सागर के बहुचर्चित मानसिंह पटेल की गुमशुदगी के मामले में सुप्रीम कोर्ट के एसआइटी गठित कि हैं, इसमें चार माह में जांच पूरी करने के निर्देश मिलने के बाद पुलिस विभाग में हड़बड़ी मच गई है। आठ साल बाद पुलिस फिर सक्रिय हुई, लेकिन पहले ही प्रयास में सिविल लाइन थाने ने बड़ी लापरवाही कर दी।
वाहवाही लूटने के चक्कर में मानसिंह जैसे दिखने वाले एक शख्स को भोपाल से सागर ले आई, लेकिन जब जांच हुई, तो पता चला, वह भोपाल के बैरसिया क्षेत्र का संतोष श्रीवास्तव है, जो कबाड़ी है।
दरअसल ओबीसी महासभा की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने गुमशुदगी की रिपोर्ट पर अज्ञात पर केस दर्ज करने को भी कहा था। मामले में सागर एसपी विकास कुमार शाहवाल ने कहा, आशंकाओं के चलते पूछताछ चल रही है। डीएनए सैंपल भी लिया जाएगा। परिजनों ने पुष्टि की है कि जिस व्यक्ति को अभिरक्षा में लिया है, वह मानसिंह पटेल नहीं है।
सिविल लाइन थाना पुलिस के पास मानसिंह की जो आठ साल पुरानी फोटो है, उसमें मानसिंह की बाईं आंख पर सफेद जाला जैसा कुछ है। इसी प्रकार के एक शख्स की भोपाल में होने की सूचना मिलते ही थाना प्रभारी के नेतृत्व में एक टीम भोपाल पहुंची और उसे रविवार की रात सागर ले आई। पुलिस ने जब परिवार को पहचान के लिए बुलाया तो उन्होंने व्यक्ति के मानसिंह होने से साफ इनकार कर दिया।