Sagar-गोपाल भार्गव के क्षेत्र में अचानक इस्तीफा जानिए ऐसा क्यों
सागर जिले की गढ़ाकोटा नगर पालिका में अध्यक्ष दीपा लहरिया ने 2 साल पद पर रहने के बाद ही इस्तीफा दे दिया। इसे सरकार ने मंजूर भी कर लिया है। इसके पीछे न तो अविश्वास प्रस्ताव है न ही कोई राजनीतिक दबाव। उन्होंने स्वेच्छा से इस्तीफा दिया है। इसकी वजह 2022 में नपाध्यक्ष चुनाव के दौरान हुआ समझौता है। तत्कालीन मंत्री गोपाल भार्गव की मौजूदगी में भाजपा के सभी 23 पार्षदों ने तय किया था कि दीपा दिनेश लहरिया और संगीता मनोज तिवारी दोनों ही चार चार बार के पार्षद रहे,
इसलिए दोनों को ही अध्यक्ष बनाया जाए। नपाध्यक्ष की कुर्सी अनारक्षित वर्ग के लिए होने के कारण यह निर्णय लिया गया था। इसमें तय हुआ था कि जो पहले अध्यक्ष बनेगा, उसका कार्यकाल 2 साल का और बाद वाले का 3 साल का रहेगा। इसके तहत 2 साल का कार्यकाल होते ही उन्होंने इस्तीफा भेज दिया। उनके इस्तीफे के बाद यही चर्चा है कि राजनीतिक पद पाने के बाद अक्सर नेता, जनप्रतिनिधि दूसरे कार्यकाल के लिए कोशिश करते हैं या फिर जो वचन देकर कुर्सी पाते हैं ,
उसे कुर्सी पाने के बाद ही भूल जाते हैं। अब अगले 3 साल के लिए संगीता मनोज तिवारी का शपथ ग्रहण जल्दी ही होगा। इस संबंध में पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव ने बताया कि दिनेश और मनोज दोनों ही छोटे भाई जैसे हैं। दीपा लहरिया ने स्वेच्छा से त्यागपत्र देकर अनुकरणीय और स्वच्छ राजनीति का संदेश दिया है। मेरी जानकारी में यह प्रदेश का अपनी तरह का अनूठा और इकलौता मामला है। यह बात भी सही है कि व्यक्ति का स्वभाव है कुछ पाने के बाद वचन से पलटने का, परंतु दीपा दिनेश लहरिया ने एक ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया है जिसे राजनीतिक जगत में हमेशा याद रखा जाएगा।