जीवित बुजुर्ग को सिस्टम नहीं मान रहा जिं-दा,1 साल से खुद को जीवित साबित करने के लिए कर रहा है संघर्ष
जीवित बुजुर्ग को सिस्टम नहीं मान रहा जिं-दा,1 साल से खुद को जीवित साबित करने के लिए कर रहा है संघर्ष
गांव के खेत में खड़ा यह शख्श बीते एक साल से चीख चीख कर सिस्टम को बता रहा है कि मैं जिंदा हूं. लेकिन सिस्टम इसे जिंदा मानने को तैयार नहीं है. फाइलों में इस बुजूर्ग को मृत बताकर इसकी ढाई एकड़ जमीन गांव के ही किसी रसूखदार ने हड़प ली है. तीन साल पहले आई अभिनेता पंकज त्रिपाठी की बालीवुड फिल्म कागज में कलाकार में पंकज त्रिपाठी की एक एकड़ जमीन के लिए खुद को जीवित साबित करने के लिए 18 साल संघर्ष करना पड़ा. उसी फिल्म की तर्ज पर खरगोन जिले के कसरावद के छोटे से गांव डोलानी में करीब 95 साल के किसान बुटिया पिता फाटला भी सिस्टम को परीक्षा दे रहे हैं...
दरअसल गांव के एक शख्श बुधा पिता फाटला की मौत हुई थी लेकिन उनकी जगह बुटिया फाटला को मृत मानकर उसकी अलग अलग टूकड़ों में ढाई एकड़ जमीन को राजस्व विभाग ने बुधा फाटला के परिवार के नाम पर कर दी है. बुटिया बीते एक साल से तहसील से लेकर सीएम तक से खुद को फाइलों में जीवित करने की गुहार लगा रहा है. बुटिया कहते हैं कि खुद को जीवित साबित करना पड़ रहा है,लेकिन कोई अधिकारी मानने को तैयार नहीं हैं। बुटिया ने बताया कि उनके नाम से दर्ज जमीनों पर मुझे मृतक बताकर दूसरों के नाम पावती पर चढ़ा दिए गए हैं।
बुटिया ने जमीन के लिए ग्राम पंचायत से लेकर तहसीलदार कार्यालय, कलेक्टर कार्यालय से लेकर सीएम हेल्प लाइन तक गुहार लगाई है, लेकिन खुद को जीवित साबित करने में सफल नहीं हो रहे हैं. बुटिया फाटला अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से गुहार लगा रहे की मे जिन्दा हूँ मेरी जमीन मुझे दिलाई जाए।
बुटिया के पोते बहादुर ने बताया कि एक साल से मैं और दादा अधिकारियों से गुहार लगा रहे हैं,लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है. बुटिया ने कहते हैं कि उम्र के इस पड़ाव में खुद को जीवित साबित करते करते मैं थक हार गया हूं.
बुटिया के मामले में राजस्व विभाग की सिस्टम कितना सुस्त है कि मामले की जांच तक नहीं करा रहे हैं। वही इस मामले मे sdm ने फोन पर चर्चा मे बताया की तहसीलदार से जानकारी जुटाएंगे. एक साल में उसके नाम की जमीन कब दूसरे किसान के नाम पर हुई है. इसकी जानकारी लेंगे किसान को बुलाएंगे.