सागर-गांव से आई गुस्साई महिलाओं ने क्यों कहा कि नेता केवल वोट मांगने और फिर | sagar tv news |
सागर जिले के बीना जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाली रामसागर ग्राम पंचायत के गोंची गांव के लोगों ने आवास सहित अन्य मूलभूत सुविधाएं न मिलने के कारण सरकार और प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन कर नायब तहसीलदार सुशील खरे को ज्ञापन सौंपा है। गांव से आई गुस्साई महिलाओं ने कहा कि नेता केवल वोट मांगने के लिए आते हैं, काम कुछ नहीं करते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि अभी तक हम लोगों ने ग्राम पंचायत के सचिव का चेहरा नहीं देखा है।
वह कभी गांव में आते ही नहीं है तो गांव का विकास कैसे होगा। गोंची गांव से बड़ी संख्या में महिला और पुरुष किसान नेता इंदर सिंह के नेतृत्व में ज्ञापन देने के लिए तहसील कार्यालय पहुंचे। गांव की जामवंती लोधी ने कहा कि हम गांव वालों को अभी तक आवास योजना का लाभ नहीं मिला है, नेता लोग केवल चुनाव में वोट मांगने के लिए आते हैं, उसके बाद सब कुछ हम लोगों पर ही छोड़ दिया जाता है।
गांव की धनेश्वरी लोधी, शारदा लोधी, गुड्डीबाई लोधी ने कहा कि गांव में करीब 40-50 परिवार के लोग रहते हैं लेकिन न तो उन्हें आवास योजना का लाभ मिला है और न ही शौचायल बनाए गए हैं। साथ ही उज्ज्वला योजना, गांव की सड़क, पानी और राशन पर्ची जैसी अन्य समस्याओं से भी हम लोग परेशान हैं। गोंची गांव की कमलरानी कुशवाहा, पदमा लोधी ने कहा कि बारिश के मौसम में बेतवा नदी में बाढ़ आने पर गांव के घरों में पानी भर गया था।
जिससे घरों की दीवारें कच्ची होने की वजह से जर्जर हो चुकी हैं। बारिश के दौरान कई लोगों को स्कूल में शरण लेना पड़ी थी। मजबूरी में हम लोगों को जर्जर कच्चे मकानों में रहना पड़ रहा है। कई लोग तो घरों के बाहर सोते हैं। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि दबंग लोगों के तो आवास आ जाते हैं लेकिन हम गरीबों को आवास के लिए परेशान होना पड़ता है। उन्होंने बताया कि पंचायत के रामसागर और बगसपुर गांव में आवास सहित अन्य योजनाओं का लाभ मिल रहा है लेकिन उसी पंचातय का गोंची गांव सभी योजनाओं से अछूता है।
गांव की ज्ञानबाई कुशवाहा, सिरनाम लोधी, घनश्याम लोधी ने बताया कि ग्राम पंचायत के सचिव का अभी तक हम लोगों ने चेहरा तक नहीं देखा है कि कौन पंचायत का सचिव है। ग्राम पंचायत में आयोजित होने वाली ग्राम सभा केवल कागजों में ही हो जाती है। सचिव की लगातार अनुपस्थिति की वजह से उन्हें हर काम के लिए कई दिनों तक ग्राम पंचायत के चक्कर काटना पड़ता है लेकिन इसके बाद भी वह नहीं मिलते हैं। छोटे-छोटे कामों के लिए उन्हें परेशान होना पड़ रहा है।
रामसागर ग्राम पंचायत के सचिव इसरार खान ने बताया कि वर्ष 2018 में जो सर्वे हुआ था, उसके हिसाब से आवास स्वीकृत हुए हैं। उस समय मैं पंचायत में नहीं था। मेरे पंचायत में पदस्थ होने के पहले ही सर्वे हो चुका है। इसमें मैं कुछ नहीं कर सकता हूं। ग्रामीणों ने जो आरोप लगाए हैं कि वह पंचायत में नहीं जाते हैं तो यह सरासर गलत है।