Sagar- अष्टविनायक गणेश का प्रदेश में इकलौता मंदिर, गोपाल भार्गव करा रहे भव्य प्राण प्रतिष्ठा
सागर जिले की गढ़ाकोटा में सुनार नदी के किनारे भगवान गणेश का प्राचीन मंदिर है अब यहां भगवान गणेश की अष्ट विनायक स्वरूप में दर्शन होंगे, क्योंकि यहां पर श्री अष्टविनायक के आठो स्वरूप की मूर्ति स्थापना का भव्य प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव चल रहा है, महाराष्ट्र के बाद यह देश का दूसरा श्री अष्टविनायक मंदिर होगा, महाराष्ट्र के पुणे एवं बारामती जिलों में ही स्वयंभू श्री अष्टविनायक विराजमान हैं,
पं गोपाल भार्गव ने बताया कि श्री मयूरेश्वर स्वरुप मोरगांव, श्री सिद्धिविनायक सिध्दटेक, श्री विघ्नेश्वर ओझर, श्री गिरिजात्मज लेण्याद्री, श्री चिंतामणी थेऊर, श्री बल्लालेश्वर पाली, श्री वरदविनायक मरड़ एवं श्री महागणपति राजणगांव के हुबहू स्वरुप की स्थापना गढ़ाकोटा के मंदिर में की जा रही है। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र में विराजमान अष्टविनायक की आठ मूर्तियों की तरह ही राजस्थान के कारीगरों द्वारा तैयार की गई आठ मूर्तियां मंदिर में विराजमान हो रही हैं।
सनातन संस्कृति में भगवान श्री गणेशजी के श्री अष्ट विनायक स्वरुप की परिक्रमा का विशेष महत्व है। क्षेत्र ही नहीं पूरे राज्य के लोग यहां आकर श्री अष्टविनायक के दर्शन लाभ ले सकें इसी कामना के साथ प्राण प्रतिष्ठा कराई जा रही है। उन्होंने बताया कि सुनार नदी के तट पीपल घाट पर यह भगवान श्री गणेशजी का प्राचीन मंदिर है। जहां स्वयं प्रकट भगवान गणेशजी विराजमान हैं
24 जनवरी से शुरू हुआ प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम 1 फ़रवरी तक चलेगा, 3 फ़रवरी को प्रसादी वितरण का कार्यक्रम होगा