Sagar - हालत बिगड़ने के बाद प्रसूता को किया रेफर, रास्ते में प्रसव हुआ, लेकिन शिशु को नहीं बचा पाए
सागर शहर के एक निजी नर्सिंग होम में इलाज के दौरान लापरवाही बरते जाने से प्रसूता महिला के गर्भस्थ शिशु की मौत होने का मामला सामने आया है। निजी अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में लापरवाही बरतने के आरोप लगाते हुए परिजन ने पुलिस से मामले की शिकायत की है। कोतवाली पुलिस ने मृत शिशु का पोस्टमार्टम कराकर मामले की जांच शुरू कर दी है। इधर इस मामले में प्रबंधन का पक्ष जानने के लिए मनोकामना नर्सिंग होम की संचालक डॉ. ऊषा सैनी से संपर्क किया गया। लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया
नेपाल पैलेस निवासी पंकज सोनी ने बताया कि 32 साल की पत्नी रानी गर्भवती थी। जिसका शुरू से ही कटरा स्थित मनोकामना नर्सिंग होम में इलाज चल रहा था। कुछ दिन पहले पत्नी को हाई ब्लड प्रेशर की शिकायत बताते हुए नर्सिंग होम की डॉ. ऊषा सैनी ने दवाइयां दी थीं। इसके बाद मंगलवार की दोपहर अचानक रानी को पेट में दर्द उठा। शाम करीब 4 बजे उसे नर्सिंग होम ले गए। जहां डॉ. सैनी ने गर्भस्थ शिशु का परीक्षण किया और उसे स्वस्थ बताते हुए दर्द का इलाज शुरू किया। रानी को नर्सिंग होम में ही भर्ती कर उसे ड्रिप लगाई गई। शाम को डॉ. सैनी पत्नी को दी जाने वाली दवाओं की जानकारी नर्स को देकर चली गईं। रात में हालत बिगड़ने पर अस्पताल के स्टाफ के जरिए डॉक्टर सैनी को जानकारी भेजी गई। रात करीब 9 बजे डॉक्टर नर्सिंग होम पहुंचीं और पत्नी का परीक्षण कर गर्भस्थ शिशु को खतरा बताया। तुरंत बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज ले जाने की सलाह दी।
पंकज के अनुसार रानी को आनन-फानन में चार पहिया वाहन से बीएमसी लेकर निकले, लेकिन रास्ते में ही प्रसव हो गया। परिजन ने जैसे-तैसे मां-शिशु को मेडिकल कॉलेज पहुंचाया। यहां ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों ने जांच कर शिशु को मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों का कहना था कि शिशु की काफी पहले गर्भ में ही मृत्यु हो गई थी। फिर डॉक्टर किस मर्ज का इलाज कर रहे थे।
पंकज ने बताया कि नर्सिंग होम में दी गई दवाइयों के कारण गर्भस्थ शिशु पर विपरीत असर पड़ा, जिसके कारण उसकी मृत्यु हो गई। अपनी गलती छिपाने के लिए उसे रेफर कर दिया। अस्पताल के नर्सिंग स्टाफ ने रानी की ट्रीटमेंट फाइल से उसे दी जाने वाली दवा और इलाज की सारी पर्चियां और रसीदें भी निकाल लीं।