अंडा बेचने वाले के नाम पर 50 करोड़ का घोटाला, आयकर विभाग से मिला नोटिस
मध्य प्रदेश के दमोह जिले के पथरिया थाना क्षेत्र में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक हाथ ठेले पर अंडे बेचने वाले मजदूर को आयकर विभाग से 50 करोड़ रुपये के वित्तीय लेनदेन का नोटिस मिला। इस नोटिस में उससे करोड़ों के कारोबार का हिसाब मांगा गया है, जिसे देखकर मजदूर और उसका परिवार सदमे में हैं। नोटिस में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में प्रिंस इंटरप्राइज नामक एक फर्जी कंपनी बनाई गई और उस पर करोड़ों रुपये का लेनदेन दिखाया गया। जब पीड़ित ने इस बारे में जानकारी जुटाई, तो सामने आया कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने उसके आधार कार्ड और पैन कार्ड का दुरुपयोग कर यह कंपनी पंजीकृत कराई थी।
क्या है पूरा मामला? दरअसल पथरिया वार्ड क्रमांक 14 निवासी प्रिंस सुमन अपने जीवनयापन के लिए ठेले पर अंडे बेचते हैं। 20 मार्च 2025 को उन्हें दिल्ली आयकर विभाग से नोटिस मिला, जिसमें 49.24 करोड़ रुपये के वित्तीय लेनदेन का हिसाब मांगा गया। आयकर अधिनियम 1961 की धारा-133(6) के तहत उनसे इनकम टैक्स रिटर्न (ITR), बैंक स्टेटमेंट, व्यवसायिक दस्तावेज और जीएसटी से जुड़ी जानकारी मांगी गई। नोटिस मिलते ही प्रिंस और उनके परिवार के होश उड़ गए, क्योंकि वे इतने बड़े आर्थिक लेनदेन से पूरी तरह अनजान थे।
जब पीड़ित ने इस मामले में आयकर विशेषज्ञों से सलाह ली, तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ। किसी अज्ञात व्यक्ति ने मजदूर के दस्तावेजों का उपयोग कर ‘प्रिंस इंटरप्राइज’ नाम से एक फर्जी कंपनी पंजीकृत करा ली। यह कंपनी 7 दिसंबर 2022 को दिल्ली के झंडेवालान, फ्लैटेड फैक्ट्री कॉम्प्लेक्स में रजिस्टर कराई गई थी। कंपनी का जीएसटी नंबर 07O COPS6227R1Z7 था, जिसके जरिए करोड़ों का फर्जी वित्तीय लेनदेन किया गया।
घोटालेबाजों ने कंपनी का इस्तेमाल करने के बाद इसे बंद कर दिया, जिससे मजदूर को इस पूरे फर्जीवाड़े की भनक तक नहीं लगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला उन सभी लोगों के लिए चेतावनी है जो अपने दस्तावेजों को सुरक्षित नहीं रखते। आधार कार्ड और पैन कार्ड जैसी सरकारी पहचान पत्रों का दुरुपयोग कर फर्जी कंपनियां बनाई जा रही हैं। इसके जरिए बैंक खातों, जीएसटी और आयकर से जुड़ी धोखाधड़ी को अंजाम दिया जा रहा है। कई मामलों में असली अपराधी फरार हो जाते हैं और निर्दोष नागरिकों को कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
प्रिंस सुमन ने इस मामले में दमोह पुलिस अधीक्षक, साइबर सेल, आयकर विभाग और जीएसटी अधिकारियों को आवेदन देकर निष्पक्ष जांच की मांग की है। परिवार का कहना है कि वे बेहद गरीब हैं और इतने बड़े आर्थिक घोटाले में उनका कोई लेना-देना नहीं है। अब वे उम्मीद कर रहे हैं कि जांच एजेंसियां इस घोटाले की सच्चाई सामने लाएंगी और असली अपराधियों को पकड़ेंगी।
अपने आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य सरकारी दस्तावेजों को सुरक्षित रखें। किसी भी अनजान व्यक्ति या एजेंसी को अपने दस्तावेज देने से पहले पूरी जांच-पड़ताल करें। अगर कोई दस्तावेज़ गुम हो जाए, तो तुरंत पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराएं और आधार-पैन लिंकिंग पर नजर रखें। बैंक या आयकर विभाग से कोई संदिग्ध नोटिस मिले, तो तुरंत संबंधित अधिकारियों से संपर्क करें। अगर आपको भी किसी संदिग्ध लेनदेन की सूचना मिले, तो तुरंत सतर्क हो जाएं और संबंधित विभाग से संपर्क करें!