जनपद सीईओ और उपयंत्री पर लगे 11 लाख रिश्वत लेने के आरोप, कलेक्टर से हुईं शिकायत | sagar tv news |
एमपी के सागर संभाग के टीकमगढ़ जिले की जनपद पंचायत जतारा जो हमेशा से प्रदेश की सुर्खियों में बनी रहती है, चाहे भ्रष्टाचार का मामला हो या फिर पलायन का। ऐसा ही एक मामला आज जिला मुख्यालय पर गुरुवार को कलेक्टर के समक्ष आया जिसमें ग्राम पंचायत सतगुवा की महिला सरपंच संगीता यादव ने सैकड़ो की संख्या में ग्रामीणों के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचकर कलेक्टर को शिकायती पत्र सौंपा है। पीड़ित महिला सरपंच ने आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी ग्राम पंचायत में 2 वर्ष पूर्व 80 लाख रुपए की लागत राशि से ग्राम पंचायत में विकास कार्य कराए गए थे। जिनके मूल्यांकन के लिए जनपद पंचायत जतारा के सीईओ सिद्ध गोपाल वर्मा और ग्राम पंचायत के उपयंत्री संतोष परिहार ने 2 वर्ष पूर्व मूल्यांकन के एवज में 11 लाख रुपए रिश्वत के तौर पर लिए थे, लेकिन उन कार्यों का आज दिनांक तक मूल्यांकन नहीं किया गया है।
जब पीड़ित महिला सरपंच ने मूल्यांकन करने की बात कही तो जनपद सीईओ के द्वारा मूल्यांकन नहीं कराया जा रहा है, और पंचायत को ठेके पर देने का दबाब बनाया जा रहा है। वही ग्रामीणों ने कहा कि उनके द्वारा ग्राम पंचायत में बनाए गए तालाब, डग पॉइंट और परकुलेशन टैंक निर्माण कार्य में मजदूरी की थी, जिसकी मजदूरी की राशि आज दिनांक तक उन्हें नहीं मिली है। ग्राम पंचायत की सरपंच ने बताया कि उनके द्वारा उक्त निर्माण कार्यों के करीब 30 लाख रुपए के मस्टर रोल डाले गए थे जो सीईओ सिद्ध गोपाल वर्मा के द्वारा शून्य कर दिए हैं। जिससे अब मजदूरों को मजदूरी की राशि नहीं मिल रही है और मजदूर ग्राम पंचायत से पलायन करने पर मजबूर हैं।
महिला सरपंच ने आरोप लगाते हुए कहा कि सीईओ सिद्ध गोपाल वर्मा और उपयंत्री संतोष परिहार के द्वारा उन्हें अनावश्यक परेशान किया जा रहा है और धारा 40 का नोटिस दिया जा रहा है। जबकि उनकी ग्राम पंचायत में सभी कार्य पूर्ण हैं, जिनकी जिले के वरिष्ठ अधिकारियों से जांच करा ली जाए। टीकमगढ़ जिले की जनपद पंचायत जतारा लंबे समय से प्रदेश में भ्रष्टाचार के मामलों में हमेशा सुर्खियों में रहती है, जिससे जनपद पंचायत के अधिकारियों और कर्मचारी के द्वारा रिश्वत लेने के आरोपों से इनकार नहीं किया जा सकता है। एक तरफ जिले के कलेक्टर विवेक श्रोतिय द्वारा ग्राम पंचायतों में मजदूरों को मजदूरी दिलाने की मुनादी करा कर पलायन से रोकने का कार्य कर रहे हैं, तो वहीं उनकी जनपद पंचायत जतारा के अधिकारी कलेक्टर की मुहिम को धता बताकर मजदूरों को पलायन करने पर मजबूर कर रहे हैं।