सागर- फोरम कोर्ट ने बीमा कंपनी को सिखाया सबक, सारे पैंतरे फेल, देनी पड़ेगी इलाज की राशि
सागर के व्यक्ति ने अपने परिवार का बीमा एक हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी से करवाया. कुछ महीने बाद बीमाधारक कैंसर पीडित निकला और उन्होंने अपना इलाज मुंबई स्थित टाटा मेमोरियल कैंसर हास्पिटल में कराया. इसके बाद उन्होंने बीमा कंपनी में क्लैम किया. लेकिन बीमा कंपनी ने ये कहते हुए क्लैम निरस्त कर दिया "आपको पहले से ही कैंसर था और पॉलिसी लेते समय बीमारी को छिपाया गया." परेशान होकर बीमाधारक ने फोरम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया.
मामले के अनुसार कैंसर पीड़ित बीमाधारक के वकील पवन नन्होरिया ने बताया "सागर जिले की देवरी तहसील के बीना वारहा के रहने वाले एक व्यक्ति ने Niva Bupa Health Insurance Company Limited की ससागर शाखा में 8 दिसंबर 2023 से 7 दिसंबर 2024 तक का एक साल का हेल्थ इश्योरेंस करवाया. इसके बाद फरवरी 2024 में उन्हें गर्दन में दर्द की शिकायत हुई. दर्द ठीक ना होने पर जब उन्होंने मेडिकल जांच करायी तो कैंसर होने की आशंका जतायी गयी. इसका इलाज उन्होंने मुंबई के टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल में कराया. उनका इलाज अप्रैल 2024 से अगस्त 2024 तक चला.
इलाज के दौरान उनके 4 लाख 47 हजार खर्च हुए. इलाज के बाद उन्होंने हेल्थ इश्योरेंस कंपनी में बीमा दावा पेश किया. इस पर बीमा कंपनी ने इस आधार पर क्लैम निरस्त कर दिया कि पहले से बीमारी थी. बीमा कराते वक्त कंपनी से ये जानकारी छिपायी गई. बीमाधारक ने वकील पवन नन्होरिया के माध्यम से जिला उपभोक्ता फोरम में केस लगाया. यहां बीमा कंपनी दावा निरस्त करने के कारण को प्रमाणित करने में नाकाम रही
एडवोकेट पवन नन्होरिया ने बताया बीमा कंपनी दावा निरस्त करने के कारण कोर्ट में सिद्ध नहीं कर पायी तो आयोग के अध्यक्ष राजकुमार कोष्टा और सदस्य अनुभा वर्मा ने बीमाधारक को संपूर्ण बीमा राशि 4 लाख 27 हजार 407 रुपए 6 प्रतिशत सालाना ब्याज सहित देने का आदेश दिया. इसके अलावा सेवा में कमी और क्षतिपूर्ति को लेकर 12 हजार की राशि बीमाधारक को अदा करने का आदेश दिया.