400 साल पुरानी ‘अजब कुंवरी बावड़ी’: एक ऐतिहासिक धरोहर; जलमहल खंडहर तक, मरम्मत के लिए मिले 55 लाख रु
मध्यप्रदेश अपने अंदर एक गहरा और पुराना इतिहास समेटे हुए है। ऐसी ही एक 400 साल पुरानी अजब कुंवरी बावड़ी है जो ऐतिहासिक नगर रीवा में है। एक समय बघेल राजवंश की गौरवशाली राजधानी रहा जिसमे ये बावड़ी है लेकिन अब अपनी भव्यता खोती जा रही है, पर आज भी ये बावड़ी इतिहास की गवाही देती खड़ी है।
यह बावड़ी महाराजा भाव सिंह की रानी अजब कुंवरी ने 1664-70 में बनवाई थी। राजस्थान और मालवा की वास्तुकला शैलियों से प्रभावित होकर इस बावड़ी को न केवल जलाशय के रूप में, बल्कि राजपरिवार की जलक्रीड़ा के लिए भी उपयोग में लाया जाता था। इसके निर्माण हेतु भारत के कोने-कोने से कारीगरों को आमंत्रित किया गया था, जिन्होंने इस धरोहर को शिल्पकला का जीवंत उदाहरण बना दिया।
बावड़ी के प्रथम तल में एक वर्गाकार छोटा कक्ष स्थित है, जिसमें चारों ओर खिड़कियां बनी हैं। इनमें से एक खिड़की तुर्क शैली में निर्मित है, जिसका उद्देश्य जलक्रीड़ा का दृश्य देखना था। गर्मियों में भी यहां प्राकृतिक शीतलता बनी रहती है, जो तत्कालीन वास्तुकला की बेजोड़ समझ को दर्शाता है।
वर्तमान में, इस पुरानी बावड़ी की स्थिति बहुत ही दयनीय है। पुरातत्व विभाग का केवल एक बोर्ड इसकी पहचान बनकर रह गया है। रखरखाव के अभाव में यह नशेड़ियों का अड्डा बन चुका है, जिससे इसके पहचान पर संकट मंडरा रहा है।
हालांकि, अब नगर निगम ने इसके मरम्मत के लिए 55 लाख रुपए की योजना बनाई है। नगर आयुक्त ने भरोसा दिलाया है कि जल्द ही कार्य प्रारंभ होगा और यह धरोहर फिर से अपने गौरवशाली स्वरूप में लौटेगी।