सागर में चारकोल आर्ट वर्कशॉप में युवाओं ने सीखी रेखाओं की भाषा, बुंदेलखंड की विरासत को दिया नया जीवन
सागर में 22 अगस्त से शुरू हुई पाँच दिवसीय चारकोल पोर्ट्रेट वर्कशॉप का समापन 27 अगस्त को हुआ। इसमें 8 से 35 वर्ष तक के 25 उत्साही कलाकारों ने हिस्सा लिया और चारकोल जरिये से पोर्ट्रेट कला की गहराई तकनीक और बारीकियों को सीखा। वर्कशॉप का मुख्य उद्देश्य प्रतिभागियों को पारंपरिक चारकोल आर्ट की बारीक समझ के साथ दक्ष बनाना था।
इस वर्कशॉप का सबसे बड़ा आकर्षण रहा – बुंदेलखंड के गौरव पद्मश्री सम्मानित स्व. रामसहाय पाण्डेय का चारकोल पोर्ट्रेट। कलाकारों ने अपनी कला समर्पण और भावनाओं से इस चित्र को जीवंत बना दिया, जो सभी के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव रहा।
ये वर्कशॉप बुंदेली लोक नृत्य एवं कला परिषद् कनेरा देव सागर द्वारा आयोजित की गयी और पूरे सत्र का सशक्त मार्गदर्शन गुरुकृपा फाइन आर्ट क्लासेस के प्रशिक्षक एवं संचालक हेमन्त ताम्रकार ने किया, जिन्होंने तकनीकी कौशल के साथ-साथ रचनात्मक दृष्टि विकसित करने पर भी विशेष बल दिया।
समापन समारोह में गुरुकृपा फाइन आर्ट क्लासेस के संरक्षक भोपाल से आये हरिकांत दुबे और बुंदेली लोककला व नाट्यकला के संरक्षक संतोष पांडे विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने कलाकारों की सराहना करते हुए भविष्य में भी ऐसे आयोजनों की आवश्यकता पर बल दिया।
यह वर्कशॉप न सिर्फ़ युवाओं के लिए सीखने और कला को समझने का अवसर बनी बल्कि बुंदेलखंड की लोककला परंपरा को नई पीढ़ी से जोड़ने की प्रेरणादायक कोशिश भी साबित हुई।