नागपंचमी पर खुलते हैं श्री नागचन्द्रेश्वर के पट, नेपाल से लाई गई अनोखी प्रतिमा, दुनिया में कहीं नहीं
सावन का पावन महीना और नागपंचमी का पर्व आते ही करोड़ों श्रद्धालुओं की नजरें एमपी के उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर पर टिक जाती हैं। यहां मंदिर के दूसरे तल पर स्थित श्री नागचन्द्रेश्वर मंदिर के पट साल में सिर्फ एक बार, नागपंचमी के दिन 24 घंटे के लिए ही खोले जाते हैं। इस बार ये पट 28 जुलाई 2025 की रात 12 बजे खुलेंगे और 29 जुलाई की रात 12 बजे तक भक्तों के दर्शन के लिए खुले रहेंगे। इस मंदिर में स्थापित 11वीं शताब्दी की दुर्लभ भगवान नागचन्द्रेश्वर की प्रतिमा अद्वितीय है। सात फनों से सुशोभित नागदेवता के साथ शिव-पार्वती विराजित हैं, उनके साथ नंदी, सिंह, गणेश, कार्तिकेय, सूर्य और चंद्रमा भी अंकित हैं। ऐसी मान्यता है कि यह प्रतिमा नेपाल से लाई गई थी, और इसके जैसे दर्शन दुनिया में कहीं और नहीं होते।
पट खुलने के साथ ही श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़े के महंत विनीतगिरी जी महाराज एवं अन्य अधिकारी पहले पूजन और अभिषेक करेंगे। मंगलवार 29 जुलाई को दोपहर 12 बजे अखाड़े द्वारा पुनः पूजन होगा। शाम को महाकाल मंदिर की सायं आरती के बाद नागचन्द्रेश्वर जी की विशेष पूजा-अर्चना और आरती भी की जाएगी। 29 जुलाई की रात 12 बजे भगवान के पट फिर से वर्ष भर के लिए बंद कर दिए जाएंगे।
हिंदू परंपरा में नागों को भगवान शिव का आभूषण माना जाता है। महाकाल मंदिर परिसर के गर्भगृह के ऊपर ओंकारेश्वर मंदिर और उसके भी शीर्ष पर स्थित है यह प्राचीन नागचन्द्रेश्वर मंदिर। मान्यता है कि उज्जैन के अलावा दुनिया में ऐसी प्रतिमा और परंपरा कहीं नहीं है। नागपंचमी के इस पर्व पर देशभर से हजारों-लाखों श्रद्धालु उज्जैन आएंगे। भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा, पार्किंग, पेयजल और अन्य व्यवस्थाओं के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं, ताकि भक्त बिना किसी असुविधा के भगवान नागचन्द्रेश्वर के दुर्लभ दर्शन कर सकें।