सागर-खुरई-खिमलासा रोड की बदहाल हालत, गड्ढों में भरा पानी बना खतरा, रोजाना घा-य-ल हो रहे लोग
लगातार बारिश के चलते खुरई से खिमलासा तक 18 किमी लंबे मार्ग की हालत और भी बदतर हो गई है। इस सड़क पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे हो चुके हैं, जिनमें बारिश का पानी भर जाने से उनकी गहराई का अंदाज़ा तक नहीं लगता। इससे बाइक चालक रोजाना गिरकर घायल हो रहे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से सड़क का काम तुरंत शुरू करने की मांग की है, वहीं चेतावनी दी है कि अगर काम नहीं हुआ तो वे गड्ढों में ही वृक्षारोपण कर देंगे, ताकि कम से कम लोग गड्ढों में गिरने से बच सकें और पर्यावरण को भी लाभ हो। सागर जिले के खुरई-खिमलासा मार्ग से रोज़ाना खिमलासा, मालथौन, भरछा और उत्तरप्रदेश के बालाबेहट समेत 50 से ज्यादा गांव के लोग आवाजाही करते हैं। बारिश के बाद से सड़क पर बने गहरे गड्ढे हादसों की वजह बन रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि हर दिन 10 से 20 लोग इन गड्ढों में गिरकर घायल हो जाते हैं। सबसे ज्यादा परेशानी रात के समय होती है जब गड्ढों में भरा पानी दिखाई नहीं देता और हादसे हो जाते हैं। तेवरा के राजेश अहिरवार और दशरथ सिंह ने बताया कि करीब एक किलोमीटर के दायरे में रोज़ाना 3 से 5 लोग गिरते हैं और घायल होते हैं। वहीं, गो सेवक हरकिशन सेन ने बताया कि उनके गांव खिमलासा नई बस्ती के राहुल प्रजापति भी गड्ढे में गिरकर चोटिल हो गए।
ग्रामीणों ने बताया कि सड़क की हालत ऐसी है कि बीमार व्यक्ति को अस्पताल तक ले जाना भी मुश्किल हो जाता है। गर्भवती महिलाओं को डिलीवरी के लिए खुरई या सागर रेफर करना पड़ता है, लेकिन रोड की हालत इतनी खराब है कि एंबुलेंस भी समय पर नहीं पहुंच पाती। खुरई-खिमलासा रोड पर जगह-जगह गंदा पानी भरा होने से कपड़े खराब हो जाते हैं, जिससे विवाद की स्थिति भी बनती रहती है। 18 किमी की इस सड़क पर आए दिन हो रहे हादसों के बावजूद टोल टैक्स वसूला जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि जर्जर सड़क पर टैक्स वसूली पूरी तरह गलत है। पूर्व गृहमंत्री और खुरई विधायक भूपेंद्र सिंह भी इस मार्ग के हालात को लेकर संभागीय समीक्षा बैठक में आवाज उठा चुके हैं। उन्होंने कहा कि राहतगढ़-खुरई-खिमलासा मार्ग स्टेट हाईवे 62 का हिस्सा है, जो कई राष्ट्रीय राजमार्गों को जोड़ता है और व्यावसायिक दृष्टि से भी बेहद अहम है। इसे टू लेन पेव्ड शोल्डर के रूप में चौड़ा और मजबूत किया जाना ज़रूरी है। आसपास के ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि अगर सड़क का काम तुरंत शुरू नहीं किया गया तो वे गड्ढों में पेड़ लगा देंगे। ग्रामीणों का कहना है कि यह कदम पर्यावरण के लिए भी अच्छा रहेगा और सड़क से गुजरने वालों को भी गड्ढों का पता चलेगा, जिससे दुर्घटनाओं से बचाव हो सकेगा।