Sagar - जमीनी कहासुनी में दो भाइयों का मर्डर, कोर्ट ने 12 आरोपियों को सुनाया दोहरा उम्रकैद
जमीन विवाद के चलते दो सगे भाइयों की बेरहमी से मर्डर करने के मामले में कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश महेश कुमार झा की अदालत ने 12 आरोपियों को दोहरा आजीवन सश्रम कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई है। यह सनसनीखेज वारदात 25 अक्टूबर 2022 को हुई थी, जिसने पूरे गांव को हिला कर रख दिया था। सागर जिले के देवरी विधानसभ के गौरझामर थाना क्षेत्र के बिजौरा गांव में घटना के दिन मृतक रामबाबू ठाकुर (26) और राजाबाबू ठाकुर (24) पर पुरानी रंजिश के चलते हमला किया गया था।
जान बचाने के लिए दोनों भाई भागकर गांव के ही सुरेंद्र सिंह के मकान की दूसरी मंजिल पर पहुंचे और अंदर से दरवाजा बंद कर लिया। लेकिन आरोपियों ने दरवाजा तोड़कर दोनों भाइयों को बुरी तरह लाठी-डंडों से पीटा, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। हमले के बाद आरोपी कार से भागने लगे। इस दौरान मृतकों की मां ने उन्हें रोकने की कोशिश की, तो आरोपियों ने उन्हें भी कार से टक्कर मार दी और मौके से फरार हो गए। गंभीर रूप से घायल भाइयों को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
घटना के बाद गौरझामर थाना प्रभारी बृजमोहन कुशवाहा ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 12 नामजद आरोपियों को गिरफ्तार किया और कोर्ट में चालान पेश किया। शासन की ओर से अपर लोक अभियोजक पीएल रावत ने मामले की पैरवी की। अदालत में 26 गवाहों की गवाही कराई गई, जिनके साक्ष्यों के आधार पर सभी आरोपियों को दोषी करार दिया गया। इन आरोपियों को कोर्ट ने दोहरी उम्रकैद की सजा सुनाई है ,अभिनय उर्फ अभिनव पिता माखन सिंह दांगी, दीपक पिता जयसिंह, गुड्डा उर्फ सुजान पिता भरत सिंह, माखन पिता रघुवीर सिंह, रामराज पिता रघुवीर सिंह, मदन पिता सीताराम सिंह, गंगाराम पिता परमलाल चढ़ार, अशोक पिता रूपचंद अहिरवार, राममिलन पिता हरिराम सौर, उमेश पिता गिलू चढ़ार, बब्लू पिता गिलू चढ़ार, राकेश पिता धनीराम चढ़ार, सभी आरोपी बिजौरा गांव के निवासी हैं और जमीन को लेकर लंबे समय से मृतकों के परिवार से विवाद चला आ रहा था।
मामले में पैरवी लोक अभियोजक पी एल रावत ने बताया कि अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि आरोपियों का इरादा स्पष्ट रूप से मर्डर का था। पहले से साजिश के तहत हमला किया गया और भागने के दौरान भी मानवीयता नहीं दिखाई, बल्कि मृतकों की मां को भी घायल किया। ऐसे जघन्य अपराध में कठोर सजा ही न्याय के अनुरूप है। करीब डेढ़ साल तक चली सुनवाई के बाद मृतकों के परिजनों ने अदालत के फैसले पर संतोष जताया। उनका कहना है कि अब उन्हें न्याय मिला है और वे चाहते हैं कि भविष्य में किसी और परिवार को ऐसी पीड़ा न झेलनी पड़े।