बादलों का कहर, 4 फीट पानी में पहुंचकरकलेक्टर ने किया रेस्क्यू ,15 से 20 महिलाओं का किया रेस्क्यू
एमपी के सागर संभाग के दमोह में आसमान ने अचानक अपना मिज़ाज बदल लिया। बीते दो-तीन घंटे से हो रही तेज़ बारिश ने शहर से सटी सुभाष कॉलोनी को पानी के सैलाब में बदल दिया। हालात इतने गंभीर हो गए कि गलियों और सड़कों पर नावें चलने लगीं। बरसात का पानी घरों में घुस गया, जिससे लोगों के सामान भीग गए। बिजली आपूर्ति ठप हो गई और रोजमर्रा का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी चिंता और बेचैनी में डूबे रहे।
सूचना मिलते ही दमोह कलेक्टर, प्रशासनिक अधिकारी और एसडीईआरएफ की टीम मौके पर पहुंची। कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर स्वयं तीन फीट पानी में उतरकर स्थिति का जायजा लेने पहुंचे और राहत कार्य शुरू कराया। तेज़ धारा और गहरे पानी के बीच रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू हुआ, जिसमें पंद्रह से बीस महिलाओं को सुरक्षित निकालकर सामुदायिक भवन में शरण दी गई। वहां उनके रहने और खाने की व्यवस्था भी कराई गई। हालांकि, यह राहत केवल कुछ घरों तक ही सीमित रही। कई इलाके अब भी पानी से घिरे हैं और बचाव कार्य लगातार जारी है। स्थानीय लोग बताते हैं कि यह मंजर नया नहीं है—पिछले दो-तीन साल से बरसात के मौसम में यही हालात बनते हैं। स्थायी सुधार के लिए अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, और हर बार बारिश के साथ डर और परेशानी की नई लहर आ जाती है।
आज भी आसमान में बादल मंडरा रहे हैं। अगर आने वाले कुछ घंटों में और बारिश हुई, तो हालात और बिगड़ जाएंगे—घरों में और पानी घुस जाएगा और जनजीवन पूरी तरह थम सकता है। यह पानी सिर्फ सड़कों और घरों को नहीं, बल्कि लोगों की उम्मीदों को भी डुबो देता है। हर साल की तरह इस बार भी सवाल वही है—कब तक बाढ़ जैसे हालात का सामना करेंगे यहां के लोग? और कब आएगा वह दिन, जब बरसात डर नहीं, बल्कि राहत लेकर आएगी?