कलेक्टर का महादान, गर्भवती महिला को रक्तदान, लेकिन नहीं बच सकी जान, कलेक्टर खुद पहुंचे अस्पताल
ज़िला कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर ने मंगलवार को एक मिसाल पेश की, जब वे खुद जिला अस्पताल पहुंचकर एक गर्भवती महिला को रक्तदान करने आए। उनकी इस मानवीय पहल को देखकर अस्पताल में मौजूद हर कोई प्रभावित हुआ। मंगलवार को एमपी के सागर संभाग के दमोह जिला अस्पताल में एक गर्भवती महिला की हालत गंभीर हो गई और उसे तत्काल रक्त की ज़रूरत थी। यह सूचना जैसे ही कलेक्टर को मिली, उन्होंने बिना देर किए खुद अस्पताल पहुंचकर रक्तदान किया। लोग यह देखकर हैरान थे कि जिले का सबसे बड़ा प्रशासनिक अधिकारी न सिर्फ अपनी ड्यूटी निभा रहा है, बल्कि इंसानियत की मिसाल भी पेश कर रहा है।
कलेक्टर कोचर ने कहा कि रक्तदान महादान है, और अगर हमारे एक कदम से किसी की जान बच सकती है तो हमें तुरंत आगे आना चाहिए। उन्होंने जिले के लोगों से भी नियमित रक्तदान करने की अपील की, ताकि ज़रूरतमंद मरीजों की जान समय पर बचाई जा सके। लेकिन अफसोस... कलेक्टर के इस प्रयास और डॉक्टरों की पूरी कोशिशों के बावजूद गर्भवती महिला की जान नहीं बच सकी। यह खबर सुनते ही अस्पताल में मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। कलेक्टर ने परिजनों को ढांढस बंधाया और कहा कि प्रशासन हर संभव सहायता करेगा।
दमोह में हाल के दिनों में रक्त की कमी कई बार मरीजों के लिए बड़ी समस्या बन चुकी है। कलेक्टर की इस पहल से यह संदेश गया है कि यदि समाज का हर वर्ग आगे आए, तो किसी भी ज़रूरतमंद को समय पर रक्त मिल सकता है। कलेक्टर कोचर पहले भी रक्तदान और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं। उनकी यह मानवीयता एक बार फिर साबित करती है कि प्रशासनिक पद पर रहते हुए भी इंसानियत सबसे बड़ी पहचान है।