अंतिम यात्रा बनी मुश्किल यात्रा, श्मशान घाट तक पहुंचने का रास्ता नाले से होकर गांव में पुल नहीं
एमपी के सागर संभाग के दमोह जिले की जनपद जबेरा के सिग्रामपुर गांव से बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। यहां अंतिम यात्रा सम्मानजनक नहीं, बल्कि मुश्किलों भरी हो जाती है। वजह यह है कि गांव से श्मशान घाट तक जाने का एकमात्र रास्ता एक नाले से होकर गुजरता है। गांव में श्मशान तक जाने का यही एक रास्ता है, जहां पुल न होने की वजह से हर अंतिम यात्रा में लोगों को नाले के पानी से होकर गुजरना पड़ता है। बरसात में यह नाला उफान पर आ जाता है, जिससे स्थिति और भी विकट हो जाती है। सोमवार को गांव के युवक सचिन साहू की मृत्यु के बाद उनकी अंतिम यात्रा निकली। लेकिन इस दौरान परिवारजन और ग्रामीणों को घुटनों तक पानी में चलना पड़ा। यह दृश्य बेहद मार्मिक और दुखदायी रहा।
ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या नई नहीं है। पिछले साल जब यहां मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक हुई थी, तब ग्रामीणों ने पुलिया निर्माण की मांग रखी थी। आश्वासन तो मिला, लेकिन एक साल बीत जाने के बाद भी हालात जस के तस हैं। आरईएस विभाग के कार्यकारी अभियंता शिवाजी गौंड ने बताया कि मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 55 लाख रुपये की राशि मंजूर हो चुकी है। इस राशि से रिपटा और डामरीकरण का काम होगा।
तकनीकी स्वीकृति मिलते ही काम शुरू किया जाएगा। दीपक यादव, ग्रामीण का कहना है कि श्मशान तक जाने का रास्ता बेहद दयनीय स्थिति में है। हर बार हमें पानी से होकर गुजरना पड़ता है। सरकार से हमारी मांग है कि जल्द से जल्द पुल का निर्माण कराया जाए। करीब 5 हजार की आबादी वाला सिग्रामपुर आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। ग्रामीणों की सबसे बड़ी मांग यही है कि श्मशान घाट तक जाने के लिए पुल का निर्माण जल्द से जल्द हो, ताकि अंतिम यात्रा सम्मानजनक तरीके से पूरी हो सके।