सागर में वकील को गलत चालान भेजना ट्रैफिक पुलिस को पड़ा भारी कोर्ट में लगाया केस FIR की मांग
सागर में ट्रैफिक पुलिस के द्वारा एक वकील से गलत ई-चालान की राशि वसूलना भारी पड़ गया है उन्होंने नाराज होकर कोर्ट में केस ठोक दिया, जिसमें न सिर्फ उन्होंने चालान के 300 रुपए वापिस मांगे बल्कि चालान करने वाले अधिकारी कर्मचारियों पर मामला दर्ज करने की मांग की है कोर्ट में उनकी पिटीशन अप्रूव भी हो गई है जल्द ही इसमें सुनवाई शुरू की जाएगी.
कोर्ट में रिवीजन याचिका लगाने वाले शनिचरी निवासी राजेंद्र पाठक ने बताया कि 17 सितंबर 2025 को दोपहर 1:45 मिनट पर जब वह कोर्ट में हियरिंग कर रहे थे उसी समय स्कूटर से घूमते हुए बिना हेलमेट गाड़ी चलाने का चालान का कर दिया गया जिसका गाड़ी नंबर MP 15 ZE 9054 था और फिर बार-बार फोन आने लगे जिसकी वजह से परेशान होकर मैं चालान की जुर्माना राशि भी भर दी लेकिन बाद में मैंने देखा कि मेरी गाड़ी स्कूटर नहीं स्प्लेंडर है और मेरी गाड़ी का नंबर MP 15 NG 9054 है जिसका मैं मालिक हूं और मैं हमेशा हेलमेट पहन कर गाड़ी चलाता हूं, इसी के चलते मैंने अपने वकील के माध्यम से पुनरीक्षण याचिका बीएनएस की धारा 438 के तहत लगाई है. क्योंकि हर 9054 नंबर की गाड़ी राजेंद्र पाठक की नहीं होती है
याचिका पेश करने वाले एडवोकेट पवन नन्होरिया ने बताया की हमारे सीनियर अधिवक्ता राजेंद्र पाठक के खिलाफ अपराधिक प्रकरण मोटर व्हीकल एक्ट के तहत धारा 129 वो 194 के तहत पंजीबद्ध किया गया है और अर्थ दंड भी जमा कर लिया गया, अर्थ दंड इसलिए जमा उन्होंने कर दिया क्योंकि मध्य प्रदेश में सरकार के द्वारा दोहरा कानून लागू किया गया है जब कोई पकड़ा जाता है तो₹300 चालान लगता है एक हफ्ते बाद उसे कोर्ट में पेश करते हैं तो वह राशि 1000 हो जाती है और सेंट्रल का कानून लागू हो जाता है उन्होंने बताया कि यह लोक सेवक के दायित्वों के विपरीत जाकर कार्रवाई की जा रही है, इसलिए मैंने मांग भी की है कि लोक सेवक के दायित्वों का उल्लंघन की धारा 198 वो 199 के तहत उन पर मामला पंजीबद्ध किया जाए
सागर जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष जितेंद्र सिंह राजपूत ने बताया कि चालान करने के लिए जो सिटी कमांड सेंटर बना हुआ है इसमें नॉन तकनीशियन अनट्रेंड लोग हैं जो स्क्रीन को देखकर और व्यक्ति को देखकर चालान क्लिक कर देते हैं अनुभव नहीं है योगिता भी नहीं है जबकि यहां पर इंजीनियर जैसे लोग तैनात करनी चाहिए
यह पाठक जी के साथ दूसरा मामला हुआ है इसके पहले भी वह हेलमेट लगाए हुए थे लेकिन बिना हेलमेट गाड़ी चलाने का चालान दे दिया गया था इसकी शिकायत उन्होंने यातायात थाने में की थी तब उनसे कहा गया था कि आपका चालान डिलीट कर दिया जाएगा लेकिन फिर उसे कोर्ट में पेश कर दिया था और 300 के बदले 1000 की राशि चुकानी पड़ी थी, और इस बार तो हद ही कर दी उन्होंने दूसरे की गाड़ी का न सिर्फ चालान इनके नंबर पर मैसेज कर भेजा, बल्कि बार-बार फोन लगाकर वह राशि भी जमा करवाली, इसके पहले भी हम कलेक्टर से मिल चुके हैं और इस समस्या से अवगत करा चुके लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ अब फिर कलेक्टर साहब से मिलकर इस बात को उनके सामने रखेंगे