4 दिन से लापता युवक की लाश शव गृह में मिली, सड़क पर लगाया चक्काजाम, प्रशासन और दोस्तों पर ऐसा आरोप
एमपी के सागर संभाग के दमोह में एक शर्मनाक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। चार दिन से लापता युवक शुभम विश्वकर्मा का शव जिला अस्पताल के शव गृह से बरामद हुआ, लेकिन परिजनों को इसकी भनक तक नहीं लगी। गुस्साए परिवारजनों ने मंगलवार सुबह अस्पताल चौराहे पर चक्का जाम कर दिया। इस दौरान पुलिस पर चप्पलें तक फेंकी गईं और जमकर विरोध प्रदर्शन हुआ। बताया जा रहा है कि मृतक शुभम विश्वकर्मा उम्र 23 वर्ष, 9 अक्टूबर की सुबह बाइक सुधरवाने के बहाने घर से निकला था। दोपहर में उसके एक दोस्त ने कॉल कर पिता हल्के भाई विश्वकर्मा को बताया कि शराब पीने के बाद शुभम बेहोश हो गया है।
पिता ने साथी को वहीं रोकने को कहा, लेकिन जब वे मारुताल के पास पहुंचे तो शुभम वहां मौजूद नहीं था। उसी नंबर पर दोबारा फोन करने पर दोस्तों ने कहा कि वे लोग आगे निकल गए हैं। शाम तक शुभम के घर नहीं लौटने पर परिजन कोतवाली पहुंचे, लेकिन पुलिस ने तत्काल रिपोर्ट दर्ज नहीं की और अपने स्तर पर तलाश की सलाह दी। 10 अक्टूबर को आखिरकार शिकायत दर्ज की गई। चार दिन बीतने पर भी पता न चलने पर पिता ने सोमवार को एसपी से मिलकर गुहार लगाई। उसी शाम यह खुलासा हुआ कि शुभम का शव चार दिन से जिला अस्पताल के शव गृह में रखा हुआ है।
यानी न अस्पताल ने पुलिस को सही जानकारी दी और न ही पुलिस ने मृतक की खोजबीन में तत्परता दिखाई। परिजनों ने जोर देकर कहा कि शुभम के दोस्त नितिन लोधी, समीर राय, रवींद्र ठाकुर और सौरभ ने मिलकर मर्डर की साज़िश रची है। विरोध के बीच सीएसपी एच.आर पांडे ने माना कि अस्पताल प्रबंधन की ओर से सूचना न मिलने के कारण परिजनों तक खबर में देरी हुई। परिजन अब दोषियों की गिरफ्तारी और पोस्टमॉर्टम के लिए तीन डॉक्टरों का पैनल बनाने की मांग पर अड़े हैं। दूसरी ओर चौराहे पर जाम से घंटों तक अफरा-तफरी का माहौल रहा। यह पूरा क्षेत्र पूर्व में साइलेंट जोन घोषित किया गया था, लेकिन लापरवाही और गुस्से ने उसे अशांति क्षेत्र में बदल दिया।