शिवधाम कुंडेश्वर में उमड़ा आस्था का सैलाब, मोनिया मेला और गोवर्धन पूजा की भव्य परंपरा जीवंत
एमपी के सागर संभाग के टीकमगढ़ जिले की पर्यटन और धार्मिक नगरी शिवधाम कुंडेश्वर में आज एक बार फिर आस्था, परंपरा और संस्कृति का अनोखा संगम देखने को मिला। दीपावली के बाद मनाए जाने वाले मोनिया पर्व पर यहां भगवान गोवर्धन पूजा के साथ-साथ मोनिया मेला का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल हुए।
बुंदेलखंड की इस अनूठी परंपरा में ग्रामीण अंचलों से ग्वालबालों की टोली बनकर युवक हाथों में लाठी, डंडे और मोर पंख लेकर भगवान कृष्ण के सखा बन जाते हैं। ढोल-नगाड़ों की थाप पर यह टोलियां 12 गांवों का भ्रमण करते हुए कुंडेश्वर पहुंचती हैं, जहां भगवान शिव के दर्शन कर मंदिर प्रांगण में दिवारी गीत गाते हुए पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत करती हैं।
मोनिया नृत्य की यह परंपरा दीपावली की रात से शुरू होकर देवउठनी ग्यारस तक चलती है। माना जाता है कि जब भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठाकर ग्वालवालों की रक्षा की थी, उसी की स्मृति में यह पर्व मनाया जाता है। ग्रामीण युवक इसी उपलक्ष्य में कृष्ण के सखा बनकर अपने नृत्य, करतब और श्रद्धा का प्रदर्शन करते हैं।
आज आयोजित जिला स्तरीय कार्यक्रम में कलेक्टर विवेक श्रीवास्तव सहित जनप्रतिनिधियों ने विधि-विधान से गोवर्धन भगवान की पूजा अर्चना की। इस दौरान गोवंश की सुरक्षा और जैविक खेती को बढ़ावा देने का संदेश भी दिया गया। कलेक्टर ने कहा कि यदि किसान गोबर का उपयोग खाद के रूप में करें तो रासायनिक खाद से मुक्ति मिल सकती है और फसल की गुणवत्ता भी बेहतर होगी।
कुंडेश्वर मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग सभी इस पारंपरिक नजारे को देखने उमड़ पड़े। बुंदेलखंड की मिट्टी में बसी यह परंपरा आज भी उतनी ही जीवंत है जितनी सदियों पहले थी।