सागर की पहचान बन चुकी लाखा बंजारा झील इन दिनों आस्था और श्रद्धा से सराबोर है। सूर्य षष्ठी यानी छठ पर्व 2025 के अवसर पर झील किनारे गंगा आरती का आयोजन भक्तिभाव से जारी है। सोमवार को छठ व्रतियों और श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में शामिल होकर धर्मलाभ प्राप्त किया।
सागर की ऐतिहासिक लाखा बंजारा झील का नजारा सोमवार को देखने लायक था। चकराघाट से लेकर गणेशघाट तक करीब 400 मीटर लंबे घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। महिलाएं, पुरुष, बच्चे — सभी अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने के बाद गंगा आरती में शामिल हुए।
यह गंगा आरती न केवल धार्मिक आयोजन बन चुकी है, बल्कि झील को नागरिकों और आगंतुकों से जोड़ने का एक प्रेरक माध्यम भी है। नगर निगम आयुक्त एवं स्मार्ट सिटी सीईओ राजकुमार खत्री के मार्गदर्शन में आयोजित इस आरती का उद्देश्य झील को स्वच्छ और सुंदर बनाए रखना है।
स्मार्ट सिटी द्वारा किए गए सौन्दर्यीकरण कार्यों के बाद अब यह स्थल सागर का आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र बन गया है। शाम के समय जब दीपों की लौ झील के जल में प्रतिबिंबित होती है, तो दृश्य किसी स्वर्गिक नजारे से कम नहीं लगता।
हर दिन अलग-अलग वार्डों के नागरिक, महिलाएं, युवा और बुजुर्ग श्रद्धा से आरती में शामिल हो रहे हैं। गंगा आरती में कोई भी श्रद्धालु मुख्य यजमान बन सकता है। इसके लिए उन्हें आरती शुरू होने के 30 मिनट पहले श्री अंकित दीक्षित या पुजारीजन से चकराघाट पर संपर्क करना होता है।
*नोट-इधर शॉट छोड़ने है*
सागर की यह गंगा आरती अब केवल पूजा का नहीं, बल्कि शहर की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक बन चुकी है — जहां श्रद्धा, सौन्दर्य और स्वच्छता एक साथ दिखाई देते हैं।






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