सागर-इंद्रेश उपाध्याय जी महाराज बोले—सागर मिनी वृंदावन धाम है, यहां अनेक स्वरूपों में ठाकुर विराजमान हैं, मुनि सर्वार्थ सागर महाराज की पुस्तकों का विमोचन
सागर-इंद्रेश उपाध्याय जी महाराज बोले—सागर मिनी वृंदावन धाम है, यहां अनेक स्वरूपों में ठाकुर विराजमान हैं, मुनि सर्वार्थ सागर महाराज की पुस्तकों का विमोचन
सागर। बालाजी मंदिर परिसर में आयोजित भव्य धर्मसभा के समापन अवसर पर अंतरराष्ट्रीय कथा व्यास पंडित इंद्रेश उपाध्याय जी महाराज ने कहा कि सागर जिला केवल जिला नहीं, बल्कि एक धाम है। हमारे संतों ने इसे मिनी वृंदावन का स्वरूप बताया है, जहां विभिन्न रूपों में ठाकुर जी विराजमान हैं। धर्मसभा में महाराज जी द्वारा प्रस्तुत भजनों पर श्रोता भावविभोर होकर झूम उठे। समापन पर आयोजित भंडारे में भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं।
बिहार पंचमी और कृष्ण लीला का दिव्य वर्णन
प्रातः 11 बजे से शुरू हुई कथा में पं. इंद्रेश महाराज ने बताया कि बिहार पंचमी के दिन ही हरिदास जी महाराज ने वृंदावन में बांके बिहारी जी का प्राकट्य किया था। इसी दिन सिया–राम विवाह भी हुआ था, इसलिए इसे विवाह पंचमी कहा जाता है।
भागवत कथा को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि राजा कंस ने यमुनाजी का शुद्धिकरण, कालिया नाग का नाश, और इंद्र के प्रकोप से ब्रजवासियों को बचाने वाले श्रीकृष्ण को उपहार देने के बहाने मथुरा आने का निमंत्रण भेजा। यह समाचार सुनते ही पूरे ब्रज में वातावरण बदल गया और लोगों ने श्रीकृष्ण से मथुरा न जाने की प्रार्थना की।
मथुरा पहुंचकर किया कंस वध
पं. इंद्रेश महाराज ने बताया कि श्रीकृष्ण प्रारंभ में ब्रजवासियों के प्रेम में बंधे हुए मथुरा नहीं जाना चाहते थे। लेकिन नारदजी ने स्वप्न में आकर प्रभु को कंस वध, 16 हजार विवाहों और महाभारत सहित अन्य दिव्य लीलाओं की याद दिलाई। इसके बाद कृष्ण पुरस्कार लेने के बहाने मथुरा पहुंचे।
मथुरा में—
हाथी वध
पहलवान वध
और अंत में कंस वध करके उन्होंने अत्याचार का अंत किया।
इसके बाद श्रीकृष्ण ने अपने नाना को मथुरा का राजा बनाया और देवकी–वासुदेव को कारागार से मुक्त कराया। ब्रजवासियों की याद से विचलित न हों, इसलिए कृष्ण ने देवकी की आज्ञा लेकर मध्य प्रदेश में ही शिक्षा प्रारंभ की, जहां पहली बार कृष्ण–सुदामा मिलन हुआ।
जीवन में सत्संग क्यों आवश्यक?
महाराज जी ने कहा कि भगवद्भक्ति और जीवन सुधार के लिए सत्संग अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि यदुवंशियों ने सत्संग की उपेक्षा की और भगवान को केवल “हमारे सगे–रिश्तेदार” मानकर चलते रहे। ऋषियों की परीक्षा लेते हुए भगवान के पुत्र को गर्भवती महिला बनाकर ले जाने की घटना ने उन्हें ऋषि क्रोध का भागीदार बनाया, और लोहे के पिंड से बनी घास के कारण अंततः यदुवंश का नाश हुआ।
बलराम जी क्षीरसागर में प्रवेश कर गए और भगवान श्रीकृष्ण अपने दिव्य धाम पधार गए।
अंत में महाराज जी ने अर्जुन के गांडीव, राजा परीक्षित प्रसंग सुनाया और आरती के साथ कथा को विराम दिया।
भजनों पर झूमे श्रद्धालु, भंडारे में उमड़ी भीड़
पूरी कथा के दौरान “वृंदावन पायरो वृंदावन” जैसे भजनों पर श्रद्धालु नाचते–झूमते नजर आए। समापन अवसर पर आयोजित भंडारे में प्रसाद ग्रहण करने भारी भीड़ उमड़ पड़ी। कार्यक्रम के पश्चात इंद्रेशजी महाराज बांके बिहारी जी के दर्शन हेतु वृंदावन रवाना हुए।
विशिष्ट जनों की उपस्थिति
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से उपस्थित रहे— भाजपा जिला अध्यक्ष श्याम तिवारी, बंडा विधायक वीरेंद्र सिंह लोधी, सविता गोविंद सिंह राजपूत, नेवी जैन, अजित जायसवाल, जगन्नाथ गुरैया, मनीष चौबे, विक्रम सोनी, रामेश्वर नामदेव, विनय मिश्रा, मनोज जैन, मेघा दुबे, निशा शिंदे, रूपा राज, माधुरी राजपूत, प्रीति शर्मा, प्रतिभा चौबे, कविता लारिया, प्रासुक जैन, श्रीकांत जैन सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और श्रद्धालु।
मुनि सर्वार्थ सागर महाराज की पुस्तकों का विमोचन
कार्यक्रम के दौरान पट्टाचार्य आचार्य 108 विशुद्ध सागर जी महाराज के शिष्य मुनि सर्वार्थ सागर जी महाराज द्वारा लिखित पुस्तकों—
“विचित्र विचार”
“विचित्र कहानियां”
का विमोचन कथा व्यास इंद्रेश उपाध्याय जी महाराज, विधायक शैलेन्द्र जैन एवं श्रीमती अनुश्री जैन द्वारा किया गया। भाजपा जिला मीडिया प्रभारी श्रीकांत जैन ने पुस्तकों की प्रति भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया।