Sagar- धधकते अंगारों पर नंगे पैर चलकर जताई जाती है आस्था, देवरी में शुरू हुआ 400 साल पुराना अग्नि मेला
मध्यप्रदेश के सांस्कृतिक इतिहास में देवरीकलां का श्री देव खंडेराव मंदिर अपनी अनूठी परंपराओं और अद्भुत आस्था के लिए खास पहचान रखता है। आज अगहन मास की चंपा षष्ठी से शुरू हुआ ऐतिहासिक अग्नि मेला, जो अगले 10 दिनों तक जारी रहेगा। सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। पहले ही दिन हजारों भक्तों ने अग्निकुंड और गर्भगृह में पहुंचकर पूजा-अर्चना की और अपनी मनौतियां मांगीं।
400 वर्षों से चली आ रही इस अलौकिक परंपरा में इस साल भी 1300 से अधिक भक्त जलते हुए अंगारों पर नंगे पैर चलकर भगवान खंडेराव महाराज के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करेंगे। मान्यता है कि मनोकामना पूरी होने पर भक्त दोनों हाथों में हल्दी लेकर अग्निकुंड पर दौड़कर ‘धन्यवाद’ अर्पित करते हैं। आश्चर्य की बात यह है कि भक्तों को न तो कोई जलन होती है और न ही चोट। यही कारण है कि इस दिव्य दृश्य को देखने के लिए दूर-दूर से हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।
किवदंती है कि 15–16वीं शताब्दी में राजा रसाल जाजोरी के पुत्र के इलाज की मन्नत पर देव श्री खंडेराव ने स्वप्न में दर्शन दिए। आदेश के अनुसार राजा ने नंगे पैर अग्निकुंड पार किया और उनका पुत्र स्वस्थ हो गया। तभी से अग्निदौड़ की परंपरा हर वर्ष निभाई जा रही है। मंदिर में विराजमान देव श्री खंडेराव को भगवान शिव का अवतार माना जाता है।
आधे स्वरूप में माता पार्वती के साथ घोड़े पर आरूढ़ यह दुर्लभ प्रतिमा कला और आस्था का अनूठा संगम है। देवरी से 65 किमी दक्षिण (सागर) और नरसिंहपुर से 75 किमी उत्तर स्थित यह मंदिर बुंदेलखंड की सांस्कृतिक धरोहर माना जाता है। गर्भगृह में स्थित प्राचीन स्वयंभू शिवलिंग, विशाल बावड़ी और मंदिर परिसर की अन्य प्रतिमाएं यहां की दिव्यता बढ़ाती हैं। चंपा षष्ठी के दिन दोपहर 12 बजे सूर्य की किरणों का शिवलिंग पर पड़ना एक प्राकृतिक चमत्कार माना जाता है।
अग्निकुंडों में विधि-विधान से पूजा के बाद महिलाएं, पुरुष और बुजुर्ग – सभी श्रद्धालु हल्दी लेकर दो बार अंगारों पर चलकर अपनी आस्था व्यक्त करते हैं। “जय हो श्री खंडेराव” के जयकारों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठता है। मंदिर समिति ने सुरक्षा एवं भीड़ प्रबंधन की विशेष तैयारियां की हैं, ताकि यह ऐतिहासिक अग्नि मेला अपनी गरिमा और दिव्यता के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हो सके।