सागर- स्ट्रोक में गोल्डन ऑवर है जिंदगी का असली सहारा, IMA सागर ने केसली में दी जीवन बचाने वाली जानकारी
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन IMA सागर एवं स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त तत्वावधान में सीएचसी केसली में स्ट्रोक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में विशेषज्ञ डॉक्टरों ने बताया कि स्ट्रोक के बाद शुरुआती ‘गोल्डन ऑवर’ में इलाज शुरू कर दिया जाए, तो मरीज की जान 90% तक बचाई जा सकती है। कार्यक्रम की मुख्य कड़ी रहे न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. दीपांशु दुबे, जिन्होंने स्ट्रोक के शुरुआती संकेतों पर विशेष जोर दिया।
उन्होंने बताया कि कई बार लोग चेतावनी संकेतों को सामान्य कमजूरी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि यह गंभीर स्ट्रोक का संकेत हो सकता है। उन्होंने जिन लक्षणों को तुरंत पहचानने की सलाह दी, उनमें शामिल हैं— अचानक चेहरे, हाथ या पैर में सुन्नता या कमजोरी, बोलने में दिक्कत या शब्द अस्पष्ट होना, अचानक धुंधला या दोहरा दिखाई देना, तेज चक्कर, संतुलन बिगड़ना, बिना कारण तेज सिरदर्द, डॉ. दुबे ने FAST नियम याद रखने पर जोर दिया— F – Face: चेहरा टेढ़ा होना, A – Arms: एक बाजू उठाने में कमजोरी, S – Speech: बोलने में कठिनाई, T – Time: तुरंत 108 या अस्पताल को कॉल करें
उन्होंने बताया कि थ्रॉम्बोलिसिस के लिए 4.5 घंटे और थ्रॉम्बेक्टॉमी के लिए 6–24 घंटे का समय अत्यंत महत्वपूर्ण है। जितनी जल्दी इलाज शुरू होगा, दिमाग को उतनी ही कम क्षति होगी और मरीज पूरी तरह ठीक हो सकता है। देरी होने पर स्थिति लकवे या मृत्यु तक पहुंच सकती है। IMA सागर अध्यक्ष डॉ. तल्हा साद ने कहा कि उच्च रक्तचाप स्ट्रोक का सबसे बड़ा नियंत्रणीय कारण है। उन्होंने स्ट्रोक रोकथाम के लिए लोगों को नियमित रूप से BP, शुगर और कोलेस्ट्रॉल जांचने की सलाह दी।
साथ ही धूम्रपान छोड़ने, शराब सीमित करने, संतुलित आहार और नियमित व्यायाम पर जोर दिया। बीएमओ डॉ. मधुर जैन, डॉ. श्याम अग्रवाल, नर्सिंग स्टाफ, आशा कार्यकर्ता और ग्रामीणों की सक्रिय सहभागिता ने शिविर को और प्रभावशाली बनाया। अंत में IMA सागर ने कहा— स्ट्रोक के लक्षण दिखें तो एक मिनट भी न गंवाएं… क्योंकि समय ही मस्तिष्क है।