गांव का सामूहिक पलायन! 60 लोग छोड़ गए घर, काम दो, वरना गांव खाली हो जाएगा’ की गूंज
एमपी के सागर संभाग के छतरपुर जिले के भगवां जनपद के ग्राम कुसाई से एक ऐसी खबर सामने आई है जो बुंदेलखंड की जमीनी हकीकत को पूरी तरह उजागर करती है। कुसाई गांव से लगभग 60 ग्रामीण मजबूर होकर मजदूरी करने दिल्ली पलायन कर गए, और यह सिर्फ एक गांव की कहानी नहीं… बल्कि पूरे क्षेत्र की विफल विकास नीतियों का आईना है। ग्राम पंचायत भगवां के कुसाई समेत आसपास के कई गांव रोजगार की कमी, सरकारी योजनाओं के लाभ न मिलने और कृषि में लगातार हो रही तबाही से जूझ रहे हैं। हालात इतने भयावह हैं कि कई परिवारों ने घर-आंगन, खेत-खलिहान और अपनी पूरी जिंदगी छोड़कर दूसरे राज्यों का रुख कर लिया। ग्रामीणों का दर्द साफ है— “काम दो… वरना गांव खाली हो जाएगा।”
गांव वालों का दावा है कि मनरेगा जैसे रोजगार देने वाली योजनाओं को मशीनों के हवाले कर दिया गया है, जबकि मजदूरों को काम ही नहीं दिया जा रहा। सरपंच-सचिव और कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से कागजों में पूरा काम दिखाया जाता है, लेकिन असलियत में ग्रामीणों को रोजगार नहीं मिलता। विकास के पोस्टर चमक रहे हैं, मगर गांव का पेट खाली है। एक तरफ बारिश की मार, ओलावृष्टि और कीट प्रकोप ने किसानों का सब कुछ छीन लिया। फसलें बर्बाद होने से कर्ज बढ़ा और आमदनी खत्म हो गई। दूसरी ओर, पलायन करने वाले परिवार बताए रहे हैं कि बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह रुक गई है, क्योंकि मजदूरी करने वाले परिवार असुरक्षित माहौल में स्कूल भेज ही नहीं पा रहे। भविष्य अंधकार में है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि— गांव में रोजगार उपलब्ध कराया जाए, मशीनों से कार्य बंद किए जाएं, मनरेगा के कार्यों की उच्च स्तरीय जांच हो ,अधिकारियों और पंचायत जिम्मेदारों की मनमानी रोकी जाए स्थिति इतनी गंभीर है कि यदि प्रशासन ने तुरंत कदम नहीं उठाए, तो कुसाई ही नहीं… बल्कि पूरा क्षेत्र पलायन की चपेट में आ सकता है। कुसाई गांव की यह चीख सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि बुंदेलखंड की वास्तविकता का सबसे कड़वा सच है।