सागर की महिला अधिकारी की अनोखी पहल, बदली सरकारी स्कूलों की तस्वीर, बच्चों में जागा नेतृत्व
एक ओर सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था को लेकर अक्सर सवाल उठते हैं, वहीं सागर जिले के जैसीनगर विकासखंड में पदस्थ सहायक संचालक लोक शिक्षण श्रृष्टि पटेल अपने अभिनव प्रयासों से नई मिसाल स्थापित कर रही हैं। उनकी सक्रियता और जमीनी स्तर पर किए जा रहे बदलावों ने स्कूलों की छवि ही बदलकर रख दी है। पदभार ग्रहण करते ही उन्होंने स्कूलों में लगातार निरीक्षण अभियान शुरू किया। बच्चों के बीच बैठकर उनकी समस्याएँ सुनना और तत्काल कार्रवाई करना—इसी वजह से वे आज काफी चर्चा में हैं। कई स्कूल जहां पहले समस्याओं से जूझ रहे थे, अब वहां अनुशासन, उपस्थिति और पढ़ाई का माहौल स्पष्ट रूप से सुधरते देखा जा रहा है।
सबसे अनोखी पहल रही—पेपरलेस हेड बॉय और हेड गर्ल चुनाव। जिले में पहली बार सरकारी स्कूलों में बिना कागज़ इस्तेमाल किए डिजिटल और पारदर्शी तरीके से छात्र नेतृत्व चुनाव कराए गए। यह गतिविधि बच्चों में उत्साह का केंद्र बनी और उन्हें नई जिम्मेदारी का एहसास हुआ। जो अवसर निजी स्कूलों में सहजता से उपलब्ध होते हैं, वही अवसर अब सरकारी स्कूलों के बच्चों को भी मिल रहे हैं।
इन चुनावों ने बच्चों की नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास और संचार कौशल में उल्लेखनीय सुधार किया है। स्कूलों में अनुशासन बेहतर हुआ है और सबसे महत्वपूर्ण—बच्चों की उपस्थिति में तेज वृद्धि दर्ज की गई है। अब बच्चे स्कूल को सिर्फ पढ़ने आने की जगह, अपनी प्रतिभा दिखाने और आगे बढ़ने के मंच के रूप में देखने लगे हैं। शिक्षा विभाग मानता है कि श्रृष्टि पटेल का यह मॉडल जिले के अन्य ब्लॉकों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है। उनके प्रयास बताते हैं कि यदि प्रशासनिक अधिकारी जमीनी स्तर पर सक्रिय हों तो सरकारी स्कूल भी उतने ही उत्कृष्ट बन सकते हैं जितने निजी संस्थान होते हैं। श्रृष्टि पटेल का कहना है—“बच्चों को सिर्फ किताबें नहीं, बल्कि नेतृत्व, आत्मविश्वास और जीवन कौशल सिखाना भी हमारी जिम्मेदारी है। जब अवसर मिलता है, तो हर बच्चा चमक सकता है।” उनकी यह सोच और पहल सागर के सरकारी स्कूलों में सकारात्मक परिवर्तन की नई कहानी लिख रही है।