अस्पताल में रातभर डॉक्टर गायब! दो मरीज तड़पते रहे, व्यवस्था पर गंभीर सवाल |SAGAR TV NEWS|
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मंगलवार रात स्वास्थ्य व्यवस्था की बड़ी लापरवाही सामने आई है। आरोप है कि गंभीर हालत में दो मरीजों को भर्ती करवाया गया, लेकिन रातभर अस्पताल में कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था। इस दौरान दोनों मरीजों की हालत लगातार बिगड़ती रही। एमपी के उमरिया जिले के पाली के निपनिया गांव का है। दानपाल सिंह अपनी 9 वर्षीय भतीजी को रात करीब 9 बजे लूज़ मोशन और उल्टी की गंभीर तकलीफ के कारण अस्पताल लेकर पहुंचे। परिजनों का आरोप है कि नर्स ने सिर्फ एक ड्रिप लगाई—लेकिन डॉक्टर बच्ची को देखने तक नहीं आए। दानपाल सिंह ने कहा— बच्ची रातभर तड़पती रही। उसे करीब 50 बार लूज़ मोशन हुआ। कमजोरी इतनी बढ़ गई कि वह खड़े भी नहीं हो पा रही थी। लेकिन इलाज के नाम पर केवल एक ड्रिप दी गई।” उन्होंने आरोप लगाया कि एक महिला स्टाफ ने उनसे कहा—“इसे शहडोल ले जाइए, यह हमारे बस की बात नहीं है।
दूसरा मामला ग्राम कुदरी का है। कुंतीबाई अपने पति रामदीन सिंह को दोपहर में लेकर आई थीं। उनका कहना है कि डॉक्टर ने मरीज को केवल एक बार देखा और फिर अगले 20 घंटे तक कोई डॉक्टर वार्ड में नहीं आया। BMO की सफाई — “डॉक्टर थे, टोपी पहनने से पहचान नहीं पाए” जब इस मामले में BMO डॉ. पी. एल. सागर से बात की गई तो उन्होंने कहा— “डॉक्टर अस्पताल में ही थे। ठंड थी, इसलिए वे कोट नहीं पहनकर टोपी पहनकर गए थे। शायद इसी वजह से मरीजों ने उन्हें पहचान नहीं पाया।”
उन्होंने यह भी कहा— “रात का समय था, इसलिए ज्यादा दवाइयाँ नहीं दी गईं। यहां 3–4 डॉक्टर हैं और सभी समय पर ड्यूटी करते हैं।” नागरिकों का सवाल — “अगर थे तो मरीजों का इलाज क्यों नहीं हुआ?” पाली नगर के वरिष्ठ नागरिक गोपाल वासवानी ने बयान को गैर–जिम्मेदाराना बताया। उन्होंने कहा— “अगर डॉक्टर ड्यूटी पर थे तो मरीजों को देखने क्यों नहीं गए? अस्पताल बहाने के लिए नहीं, इलाज के लिए है।” कलेक्टर बोले— “लापरवाही हुई तो होगी कार्रवाई” कलेक्टर धरणेन्द्र जैन ने कहा— “डॉक्टर तैनात रहते हैं, लेकिन यदि इलाज में लापरवाही हुई है तो मैं जांच कर कार्रवाई करूंगा।” नागरिकों ने अस्पताल में ड्यूटी व्यवस्था दुरुस्त करने और रात की शिफ्ट में डॉक्टर की अनिवार्य उपस्थिति सुनिश्चित करने की मांग की है।