सागर-हमने बच्चों की तरह पाला, अब कोई कैसे काट सकता है? पेड़ों की कटाई पर बवाल, तहसील में हक की लड़ाई
सागर जिले के खुरई के करमपुर गांव में एमपी इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन द्वारा हरे-भरे पेड़ों की कटाई की तैयारी को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा फुट पड़ा। बुधवार दोपहर खुरई तहसील परिसर ग्रामीणों की भीड़ से भर गया, जहां महिलाएं, किसान, बुजुर्ग और बच्चे अपने हाथों में पेड़ों की तस्वीरें लिए पहुंचे। सभी की आवाज एक थी— “जिन पेड़ों को वर्षों से बच्चों की तरह पाला, उन्हें हमारे सामने कैसे काट सकते हैं?” ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री के नाम का ज्ञापन नायब तहसीलदार सुरेश सोनी को सौंपकर कटाई रोकने की मांग की। ग्रामीणों ने बताया कि वे लगभग 40 वर्षों से सरकारी भूमि पर कृषि कर रहे हैं। इसी जमीन पर फलदार और छायादार पेड़ उन्होंने अपने खर्च से लगाए, जिनकी संख्या काफी है। लेकिन अब एमपी इंडस्ट्रियल प्राइवेट लिमिटेड कंपनी इस भूमि पर पेड़ों को हटाकर अपना प्रोजेक्ट शुरू करना चाहती है।
एक तरफ जहां प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री “एक पेड़ माँ के नाम” जैसे अभियान चलाकर पेड़ लगाने का संदेश दे रहे हैं, वहीं ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि सरकार के संरक्षण में चल रही कंपनी कैसे हरे-भरे पेड़ों को काटने की तैयारी कर रही है? यह विरोधाभास ग्रामीणों के गुस्से का मुख्य कारण बना। गांव से बड़ी संख्या में महिलाएं भी प्रदर्शन में शामिल हुईं। उन्होंने पेड़ों की तस्वीरें हाथ में लेकर प्रशासन के खिलाफ नारे लगाए। ग्रामीणों का कहना है कि पेड़ सिर्फ जमीन का हिस्सा नहीं, बल्कि उनकी रोजमर्रा की आजीविका, पर्यावरण और भविष्य की सुरक्षा से जुड़े हैं।
किसान नेता इंदर सिंह ने प्रदर्शन के दौरान सरकार और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि बीना विधानसभा की 23 पंचायतें खुरई तहसील में आती हैं, लेकिन यहां के ग्रामीणों के साथ “सौतेला व्यवहार” किया जा रहा है। भावांतर योजना समेत कई सरकारी योजनाओं का लाभ इन्हें नहीं मिल पा रहा। अब पेड़ों की कटाई की तैयारी ने हालात और बिगाड़ दिए हैं। इंदर सिंह ने चेतावनी देते हुए कहा कि ग्रामीण अपने हक और अपने पेड़ों को बचाने के लिए किसी भी हद तक लड़ाई लड़ेंगे।