घर से भागे बच्चों को नई जिंदगी देने आगे आई उज्जैन पुलिस, नवजीवन अभियान बना मिसाल
एमपी के उज्जैन पुलिस ने उन बच्चों की जिंदगी संवारने की अनूठी पहल शुरू की है, जो घर से भागने या लापता होने के बाद तो मिल जाते हैं, लेकिन समाज के तानों और उपेक्षा के कारण सामान्य जीवन में वापस नहीं लौट पाते। ऐसे बच्चों को दोबारा सपने देखने और उन्हें पूरा करने का मौका देने के लिए पुलिस ने “नवजीवन अभियान” की शुरुआत की है।पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर 1 से 30 नवंबर तक चलाए गए मुस्कान अभियान में उज्जैन पुलिस ने इस साल लापता हुए 263 बच्चों को सुरक्षित खोज निकाला।
लेकिन वास्तविक चुनौती तब शुरू हुई, जब घर वापसी के बाद यही बच्चे सवालों, नाराज़गी और तानों का सामना करते हुए फिर से टूटने लगे। इसी संवेदनशील स्थिति को समझते हुए एसपी प्रदीप शर्मा ने मानवीय सोच पर आधारित नवजीवन अभियान को लॉन्च किया।
अभियान के तहत पुलिस ने इन बच्चों को उनके माता–पिता के साथ बुलाया। मंगलवार को लगभग 120 बच्चे अपने परिजनों के साथ पुलिस लाइन पहुंचे। यहां अधिकारियों ने न सिर्फ बच्चों की पढ़ाई, रुचियों और मनपसंद खेल के बारे में जानकारी ली, बल्कि माता–पिता की भी काउंसलिंग की, ताकि घर लौटे नाबालिग दोबारा किसी मानसिक दबाव या उपेक्षा का शिकार न हों।
एसपी प्रदीप शर्मा ने बताया— “वापस लौटे बच्चे संवेदनशील अवस्था में होते हैं। ताने, आलोचना या कठोर व्यवहार उन्हें फिर भटका सकता है। इसलिए नवजीवन अभियान में हम बच्चों को सुरक्षित माहौल देकर उनकी पढ़ाई, खेल और रुचि के अनुरूप नई राह बनाने में मदद कर रहे हैं।”
पुलिस ने बच्चों की योग्यता और रुचि के अनुसार स्कूल एडमिशन, खेल प्रशिक्षण और मार्गदर्शन की व्यवस्था करने की तैयारी भी शुरू कर दी है। यह पहल न सिर्फ बच्चों के भविष्य को संवारने की दिशा में एक अनोखा कदम है, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन का भी मजबूत संदेश देती है— हर बच्चा एक मौका और एक नई शुरुआत का हकदार है।