अवैध पीली मिट्टी खनन पर 9 विभागों को नोटिस, विशेष जांच दल गठित, 6 हफ्ते में देनी होगी रिपोर्ट!
अवैध पीली मिट्टी के उत्खनन और ईंट भट्टों के अनियमित संचालन पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने बड़ा एक्शन लिया है। पहली ही सुनवाई में ट्रिब्यूनल ने राज्य और केंद्र के कुल 9 विभागों को नोटिस जारी कर दिए हैं। इन विभागों को 2 फरवरी को होने वाली अगली सुनवाई में अपना विस्तृत जवाब देना होगा। एनजीटी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, मध्यप्रदेश प्रदूषण बोर्ड और कलेक्टर कार्यालय के अधिकारियों की तीन सदस्यीय विशेष जांच टीम गठित की है। यह टीम 6 सप्ताह के भीतर मौके का निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट कोर्ट में जमा करेगी। एमपी के उज्जैन के नागदा में सबसे खास बात—एनजीटी ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि जांच दल याचिकाकर्ताओं के साथ साइट विजिट करेगा, और अवैध उत्खनन या बिना अनुमति चल रहे सभी ईंट भट्ठों को सूचीबद्ध करेगा, ताकि दोषियों की पहचान साफ-साफ सामने आए।
इस मामले में याचिका रवीन्द्र रघुवंशी और संगीता चौहान ने दायर की थी। उनका कहना है कि लगातार अवैध खनन से पर्यावरण और खेती—दोनों को भारी नुकसान हो रहा है। अधिवक्ता अभिषेक चौरसिया ने एनजीटी के समक्ष तर्क रखे, जिसे स्वीकार करते हुए न्यायाधीश दिनेश कुमार सिंह और सुधीर कुमार चतुर्वेदी की बेंच ने मामले पर सुनवाई शुरू की। इन विभागों को जारी हुए नोटिस, मध्यप्रदेश शासन के मुख्य सचिव, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, सीआईए एमपी, मध्यप्रदेश प्रदूषण बोर्ड, कलेक्टर उज्जैन, खनिज विभाग उज्जैन, एसडीएम नागदा, तहसीलदार नागदा, नगरपालिका नागदा सीएमओ
एनजीटी में मामला दर्ज होने के बाद प्रशासन भी हरकत में आ गया है। राजस्व और खनिज विभाग की टीम ने लगातार दूसरे दिन भी गांव गिदगढ़ में जांच की। चंबल किनारे सरकारी और निजी जमीन पर 20–25 फीट तक की अवैध खुदाई मिलने पर टीम ने कई संदिग्धों के नाम सूचीबद्ध किए हैं। लगभग 10 सर्वे नंबरों की जानकारी भी जुटाई गई है। अब नजरें 2 फरवरी की सुनवाई पर होंगी, जहां अवैध खनन का पूरा सच सामने आने की उम्मीद है।