यूरिया की लाइन में किसान की मौत! परिजनों का चक्का जाम, प्रशासन हरकत में |SAGAR TV NEWS|
मध्यप्रदेश में यूरिया खाद की किल्लत किसानों के लिए दिन-ब-दिन बड़ी समस्या बनती जा रही है। टीकमगढ़ जिले में यूरिया की लंबी लाइन में खड़े एक किसान की हृदय गति रुकने से जान चली गई। इसके बाद गुस्साए परिजनों ने सड़क पर शव रखकर चक्का जाम कर दिया। पुलिस और जिला प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद स्थिति पर काबू पाया गया। टीकमगढ़ तहसील के कारी बजरूआ गांव के 52 वर्षीय किसान जमुना कुशवाहा पिछले दो दिनों से यूरिया खाद लेने के लिए लाइन में लग रहे थे। सोमवार सुबह बडोरा घाट गोदाम पर यूरिया की लाइन में खड़े-खड़े अचानक उन्हें उल्टी और चक्कर आने लगे और वे वहीं गिर पड़े। पास मौजूद किसानों ने तत्काल पटवारी और नायब तहसीलदार की मदद से उन्हें जिला चिकित्सालय पहुंचाया, लेकिन इलाज के दौरान दोपहर करीब 3:30 बजे उनकी हृदय गति रुक गई और मौत हो गई। डॉक्टरों के मुताबिक, लगातार कई घंटे लाइन में खड़े रहने और शारीरिक थकावट के चलते उनकी तबीयत बिगड़ी थी।
मृतक के परिजनों का आरोप है कि पिछले 48 घंटे से वे लाइन में लगे थे, बावजूद इसके उन्हें यूरिया नहीं मिला। प्रशासन की लापरवाही के कारण ही किसान की जान गई है। जान जाने की खबर मिलते ही परिजनों और ग्रामीणों ने नाराज़ होकर मंगलवार की सुबह सड़क पर शव रखकर चक्का जाम कर दिया। सूचना मिलते ही पुलिस और जिला प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे और समझाइश के बाद जाम खुलवाया। जिले में यूरिया संकट गहराया हुआ है। किसानों को पहले समिति से टोकन लेने के लिए घंटों लाइन में लगना पड़ता है, और फिर अगले दिन खाद वितरण केंद्र पर दूसरी बार लाइन लगानी पड़ती है। इसके बाद ही मुश्किल से तीन बोरी खाद मिलती है। इसी बीच बाजार में 267 रुपए वाली यूरिया की बोरी 500 से 600 रुपए तक ब्लैक में बिक रही है, जिससे किसान और परेशान हैं।