सागर- कॉलेज में भ्रष्टाचार का काला चिट्ठा! जांच टीम पहुंची..वरिष्ठ अधिकारियों पर संरक्षण के आरोप तेज
सागर जिले के राहतगढ़ के शासकीय महाविद्यालय में चल रही कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। उच्च शिक्षा विभाग की जांच टीम आज कॉलेज पहुंची और कई दस्तावेजों की गहन जांच शुरू की। लेकिन सवाल ये है कि पिछले पांच साल में चार से ज्यादा जांचों के बाद भी कार्रवाई शून्य क्यों रही? आखिर किसका संरक्षण मिल रहा है? आगे सुनिए इस पूरे विवाद का सच... शासकीय महाविद्यालय राहतगढ़ में लंबे समय से वित्तीय अनियमितताओं और शासकीय राशि के दुरुपयोग के गंभीर आरोप लगते रहे हैं।
इसी सिलसिले में आज उच्च शिक्षा विभाग की दो सदस्यीय टीम कॉलेज पहुंची। टीम में बीना कन्या महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. चंद्रा रत्नाकर और अकाउंटेंट नीलेश शर्मा शामिल रहे। दोनों अधिकारियों ने सहायक प्राध्यापक एवं प्रभारी प्राचार्य डॉ. चंदन सिंह सागर से जांच से संबंधित दस्तावेज मांगे और कई अहम रिकार्ड खंगाले।
जांच के दौरान शिकायतकर्ता राजीव नामदेव भी मौजूद रहे जिन्होंने जांच टीम के सामने अपना विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। उनका आरोप है कि डॉ. चंदन सिंह सागर लंबे समय से वित्तीय अनियमितताओं में लिप्त हैं, लेकिन शिकायतों के बावजूद विभागीय स्तर पर कार्रवाई नहीं होती। सबसे बड़ा आरोप वरिष्ठ अधिकारियों पर है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि आयुक्त उच्च शिक्षा विभाग ने कई बार क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक को जांच प्रतिवेदन भेजने के निर्देश दिए, लेकिन अधिकारी लगातार पत्रों को अनदेखा करते रहे। इसी वजह से भ्रष्टाचार पर कार्रवाई ठंडे बस्ते में पड़ी रही।
यह भी उल्लेखनीय है कि वर्ष 2021 से 2025 तक कॉलेज में 4 से 5 बार जांच टीमें पहुंचीं, लेकिन हर बार नतीजा शून्य रहा। लोगों का सवाल साफ है: क्या उच्च स्तर पर किसी की ढाल बनकर भ्रष्टाचार को बचाया जा रहा है? अब निगाहें इस ताजा जांच पर टिकी हैं। क्या इस बार सच सामने आएगा और क्या दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी, या फिर एक बार फिर यह जांच भी पिछले वर्षों की तरह फाइलों में दब जाएगी?