सागर में गरीबों–मजदूरों के अधिकार सुरक्षित करने का संकल्प, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस
सागर में अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस के अवसर पर मंगलवार को एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. दिवाकर सिंह राजपूत ने की, जबकि वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता एस.आर. सिंह और चर्चित व्यक्तित्व रामनरेश सिंह राजपूत मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। मानवाधिकारों पर केंद्रित इस आयोजन में बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, अधिवक्ता, साहित्यकार और युवा मौजूद रहे। कार्यक्रम में शुरुआत कविताओं और साहित्यिक अभिव्यक्तियों के साथ हुई। प्रगतिशील साहित्यकार पैट्रिक्स फुस्केल, डॉ. महेंद्र खरे और अन्य कवियों ने मानवाधिकार, समाज और संवेदनाओं पर आधारित रचनाएँ प्रस्तुत कर माहौल को भावपूर्ण बना दिया।
मुख्य अतिथि रामनरेश सिंह राजपूत ने कहा कि आज भी समाज के गरीब, असहाय और मजदूर वर्ग मानवाधिकारों के लिए संघर्ष कर रहा है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि मानवाधिकार दिवस केवल कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है—जो हमें हर कमजोर के साथ खड़े होने की प्रेरणा देता है। वहीं, एडवोकेट अनुराग सिंह ठाकुर ने मानवाधिकारों के संवैधानिक महत्व पर प्रकाश डाला और समाज में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि जब तक आम नागरिक अपने अधिकारों और कर्तव्यों को नहीं समझेगा, तब तक मानवाधिकारों का वास्तविक विस्तार संभव नहीं है।
कार्यक्रम के अंत में अध्यक्ष डॉ. दिवाकर सिंह राजपूत और डॉ. महेंद्र गौर ने मानवाधिकार दिवस के ऐतिहासिक महत्व पर बात करते हुए कहा कि यह दिन हमें याद दिलाता है कि इंसानियत सबसे बड़ा धर्म है। प्रत्येक व्यक्ति को बिना किसी भेदभाव के सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार है और समाज का प्रत्येक वर्ग इसमें बराबरी से भागीदार बने। कार्यक्रम का संचालन एडवोकेट विक्रम सिंह राजपूत ने किया। बड़ी संख्या में छात्र, सामाजिक संगठनों के सदस्य और नागरिक उपस्थित रहे। मानवाधिकार दिवस का संदेश साफ है—“समानता, सम्मान और न्याय... हर इंसान का अधिकार।”