सागर- शिशु के प्रथम 1000 दिन सबसे निर्णायक, IYCF का एक दिवसीय प्रशिक्षण, विशेषज्ञों ने दिए निर्देश
बच्चे के जन्म से लेकर दो वर्ष की आयु तक के प्रथम 1000 दिन उसके पूरे जीवन की सेहत, विकास और प्रतिरक्षा क्षमता की नींव रखे जाते हैं। इन्हीं अत्यंत संवेदनशील दिनों में उचित पोषण, सही देखभाल और वैज्ञानिक तरीकों का पालन सबसे ज्यादा जरूरी होता है। इसी उद्देश्य से राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन एवं स्वास्थ्य विभाग, मध्यप्रदेश के अंतर्गत कार्यालय क्षेत्रीय संचालक सागर संभाग द्वारा 12 दिसंबर को IYCF (Infant and Young Child Feeding) का एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। क्षेत्रीय संचालक डॉ. नीना गिडियन की अध्यक्षता में आयोजित इस प्रशिक्षण में सागर संभाग के जिलों— सागर, छतरपुर, दमोह, पन्ना, टीकमगढ़ और निवाड़ी से आए प्रमुख स्त्री एवं शिशु रोग विशेषज्ञों, FOGSI, IAP और IMA सदस्यों ने सहभागिता की। कार्यक्रम में RMNCHA कोऑर्डिनेटर तथा एविडेंस एक्शन इंडिया के क्षेत्रीय समन्वयक हुसैन खान भी उपस्थित रहे।
प्रशिक्षण में सहायक प्रशिक्षक डॉ. प्रिंस अग्रवाल ने “जन्म के तुरंत बाद स्तनपान की शुरुआत क्यों आवश्यक” विषय पर विस्तृत जानकारी दी। वहीं डॉ. बृजेश यादव ने “स्तनपान को बढ़ावा देने में प्रशासनिक व अस्पताल नेतृत्व की भूमिका” तथा “IMS Act के प्रावधान” समझाए। डॉ. मधु जैन ने “पूरक आहार की गुणवत्ता सुधारने के व्यवहारिक तरीके” पर महत्वपूर्ण प्रस्तुति दी। विशेष सत्र में जन्म के पहले घंटे में स्तनपान को जीवन रक्षक कदम बताया गया। विशेषज्ञों के अनुसार पहले दूध (कोलोस्ट्रम) में मौजूद एंटीबॉडी बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती हैं और उसे संक्रमणों से बचाती हैं।
प्राइवेट अस्पतालों के शिशु रोग विशेषज्ञों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि वे प्रसव के तुरंत बाद स्तनपान शुरू करवाने, माताओं को सही परामर्श देने और नवजात की प्रारंभिक देखभाल में IYCF प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित करें। कार्यक्रम के समापन पर क्षेत्रीय संचालक डॉ. नीना गिडियन ने कहा— “IYCF का सही क्रियान्वयन मातृ-शिशु स्वास्थ्य सुधार का सबसे प्रभावी माध्यम है। प्रशिक्षण की सीख को फील्ड और अस्पताल दोनों स्तरों पर लागू करना अनिवार्य है।”