11 घंटे तक छिपाई गई सच्चाई, आग में झुलसा मृत नवजात, सरकारी अस्पताल में मानवता शर्मसार
मध्य प्रदेश के रीवा स्थित शासकीय गांधी स्मारक चिकित्सालय से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था की संवेदनशीलता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गायनी विभाग की ओपीडी में आग लगने की घटना के बाद अस्पताल प्रबंधन ने पूरे 11 घंटे तक यह सच्चाई छिपाए रखी कि ऑपरेशन से पैदा हुआ एक मृत नवजात आग की चपेट में आ गया था। जानकारी के अनुसार गोविंदगढ़ तहसील के गहरा गांव निवासी कंचन साकेत को प्रसव पीड़ा के चलते गांधी स्मारक चिकित्सालय में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों द्वारा ऑपरेशन के माध्यम से प्रसव कराया गया, लेकिन दुर्भाग्यवश शिशु मृत अवस्था में पैदा हुआ। इसी दौरान गायनी ऑपरेशन थियेटर में अचानक आग लग गई। आग लगते ही पूरे ओटी में अफरा-तफरी मच गई और स्टाफ अपनी जान बचाने में जुट गया।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि भगदड़ के दौरान मृत नवजात को ऑपरेशन थियेटर में ही छोड़ दिया गया, जो बाद में आग की चपेट में आ गया। घटना के बाद अस्पताल प्रबंधन ने सिर्फ आग लगने की जानकारी साझा की, लेकिन नवजात के आग से प्रभावित होने की बात को करीब 11 घंटे तक दबाए रखा। जब देर रात मामले की जानकारी मीडिया और स्थानीय लोगों तक पहुंची, तब अस्पताल प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठने लगे। बढ़ते दबाव और जांच की आशंका के बाद आखिरकार अस्पताल प्रबंधन को सच्चाई स्वीकार करनी पड़ी। इस घटना ने न सिर्फ अस्पताल की आपदा प्रबंधन व्यवस्था की पोल खोल दी, बल्कि यह भी दिखा दिया कि संकट के समय मानवीय संवेदनाएं किस कदर हाशिए पर चली जाती हैं।
स्थानीय लोगों और परिजनों में इस घटना को लेकर भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि यदि नवजात मृत भी था, तो उसे इस तरह आग के हवाले छोड़ देना घोर लापरवाही और अमानवीय कृत्य है। अब सवाल यह भी उठ रहा है कि अगर यह सच्चाई सामने न आती, तो क्या अस्पताल प्रबंधन इसे हमेशा के लिए छिपाए रखता? राहुल मिश्रा, अस्पताल अधीक्षक ने बताया कि “घटना की जांच कराई जा रही है। जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।”