गरीबों के हक पर डाका, सड़क से तहसील तक गूंजा विरोध, राशन दुकान में घोटाले का आरोप |SAGAR TV NEWS|
गरीबों के हक का अनाज अगर गोदाम से दुकान तक तो पहुंचे, लेकिन थाली तक न पहुंचे, तो यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि गंभीर भ्रष्टाचार का संकेत होता है। ऐसा ही सनसनीखेज मामला सामने आया है एमपी के सागर संभाग के छतरपुर जिले के बकस्वाहा तहसील के बीरमपुरा गांव की शासकीय राशन दुकान से, जहां ग्रामीणों ने राशन में भारी हेराफेरी के आरोप लगाते हुए जमकर आक्रोश जताया। ग्रामीणों का आरोप है कि नवंबर माह का राशन लेने वे कई बार दुकान पहुंचे, लेकिन हर बार “राशन नहीं आया” कहकर लौटा दिया गया। अब दिसंबर माह में भी स्थिति संदिग्ध बनी हुई है। ग्रामीणों का सवाल है कि जब शासन द्वारा समय पर राशन आवंटित किया जा रहा है, तो फिर गरीब और आदिवासी परिवारों को उनका हक क्यों नहीं मिल पा रहा?
इस कथित अन्याय के खिलाफ बीरमपुरा के ग्रामीण एकजुट होकर बकस्वाहा तहसील कार्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने राशन दुकान के सेल्समैन मोहित बासुदेव पर अनियमितता, मनमानी और राशन वितरण में घपले के गंभीर आरोप लगाते हुए तहसीलदार भरत पांडे को ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों का कहना है कि सेल्समैन अपनी मर्जी से राशन बांटता है और कई पात्र हितग्राहियों को महीनों तक राशन से वंचित रखा जा रहा है। ज्ञापन सौंपने वालों में नरेंद्र सिंह, चंदू सौर, प्यारेलाल आदिवासी, लाड़ली बाई आदिवासी, विद्या आदिवासी, बुद्ध सिंह, हलके, लोकपाल सिंह, काशीराम सौर, रावसिंह सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल रहे। सभी ने एक स्वर में मांग की कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में गरीबों के हिस्से का अनाज लूटने की हिम्मत कोई न कर सके।
मामले की गंभीरता को देखते हुए तहसीलदार भरत पांडे ने मौके पर ही खाद अधिकारी सुगंध जैन से फोन पर चर्चा की। उन्होंने पूरी स्थिति से अवगत कराते हुए तत्काल बीरमपुरा राशन दुकान का निरीक्षण कराने और निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए। तहसीलदार ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि यदि आरोप सही पाए गए, तो संबंधितों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, ग्रामीणों की नजरें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। अब देखना यह होगा कि गरीबों के हक की लड़ाई में प्रशासन कितना सख्त और संवेदनशील रुख अपनाता है।