सागर- प्रोस्टेट इलाज में नई क्रांति, यूरोलिफ्ट तकनीक से बिना सर्जरी मिली राहत, IMA का बड़ा खुलासा
प्रोस्टेट से जुड़ी समस्याओं से जूझ रहे लाखों पुरुषों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) सागर शाखा के तत्वावधान में होटल में आयोजित मासिक कंटिन्यूइंग मेडिकल एजुकेशन (सीएमई) कार्यक्रम में प्रोस्टेट इलाज की एक अत्याधुनिक और क्रांतिकारी तकनीक यूरोलिफ्ट (UroLift) पर विस्तार से जानकारी दी गई। इस वैज्ञानिक सत्र में शहर एवं आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में चिकित्सकों ने भाग लिया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं प्रसिद्ध मूत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. मानव गिडियन ने बताया कि 60 वर्ष से अधिक आयु के अधिकांश पुरुष बिनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लासिया (BPH) की समस्या से ग्रसित होते हैं। प्रोस्टेट ग्रंथि के बढ़ने से पेशाब में जलन, बार-बार पेशाब आना, रात में नींद टूटना, धार कमजोर होना और पेशाब रोकने में कठिनाई जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं।
डॉ. गिडियन ने बताया कि यूरोलिफ्ट तकनीक एक न्यूनतम इनवेसिव प्रक्रिया है, जिसमें छोटे इम्प्लांट्स की सहायता से बढ़ी हुई प्रोस्टेट को मूत्रमार्ग से दूर कर दिया जाता है। इससे पेशाब का रास्ता तुरंत खुल जाता है और मरीज को त्वरित राहत मिलती है। इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें न तो बड़े ऑपरेशन की जरूरत होती है और न ही लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहने की। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यूरोलिफ्ट के साइड इफेक्ट्स बेहद कम होते हैं और इससे मरीज के यौन स्वास्थ्य पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता। अधिकांश मरीज कुछ ही दिनों में सामान्य जीवन में लौट आते हैं, जो इसे पारंपरिक सर्जरी से कहीं बेहतर विकल्प बनाता है।
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में स्त्री रोग एवं फीटल मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. जनिता गिडियन ने जटिल केस स्टडीज प्रस्तुत कर उनके आधुनिक प्रबंधन और उपचार पर प्रकाश डाला, जिससे उपस्थित चिकित्सकों को व्यवहारिक लाभ मिला। सीएमई की शुरुआत आईएमए सागर अध्यक्ष डॉ. तल्हा साद द्वारा जनरल बॉडी मीटिंग से हुई, जिसमें महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इनमें 24-25 अक्टूबर 2026 को आईएमए मध्यप्रदेश स्टेट कॉन्फ्रेंस का आयोजन और आईएमए लीगल कमेटी के गठन की घोषणा शामिल रही। कार्यक्रम में विशेष अतिथि डॉ. एस.एम. सिरोठिया एवं डॉ. तेजिंदर सिंह उपस्थित रहे, जबकि सीएमई के चेयरपर्सन डॉ. एस.एस. खन्ना और डॉ. जयश्री चौकसे रहे। आईएमए सागर ने ऐसे वैज्ञानिक आयोजनों के माध्यम से चिकित्सकों को नवीनतम चिकित्सा ज्ञान से जोड़ने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।