खेत बना कक्षा, किसान बने गुरु, रानी अवंतीबाई लोधी विश्वविद्यालय का लैब टू लैंड कृषि भ्रमण सफल
रानी अवंतीबाई लोधी विश्वविद्यालय, सागर के कृषि संकाय द्वारा ‘लैब टू लैंड’ अवधारणा को साकार करते हुए बी.एससी. तृतीय सेमेस्टर के विद्यार्थियों का शैक्षणिक कृषि भ्रमण एमपी के सागर संभाग के छतरपुर जिले के बक्सवाहा के राजौवा एवं कैनरादेव गाँवों में सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। इस भ्रमण का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को पुस्तक और प्रयोगशाला तक सीमित ज्ञान से बाहर निकालकर खेत की वास्तविक परिस्थितियों से रूबरू कराना और सैद्धांतिक ज्ञान का व्यावहारिक अनुप्रयोग कराना रहा।
प्रयोगशाला सहायक निधि जैन ने जानकारी देते हुए बताया कि शैक्षणिक यात्रा का शुभारंभ विश्वविद्यालय परिसर से कुलसचिव डॉ. शक्ति जैन द्वारा बस को हरी झंडी दिखाकर किया गया। इस अवसर पर उन्होंने अनुभव आधारित शिक्षा को आधुनिक कृषि शिक्षा की रीढ़ बताते हुए विद्यार्थियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दीं। इस शैक्षणिक भ्रमण का नेतृत्व कुलगुरु प्रो. डॉ. विनोद कुमार मिश्रा ने किया। उनके साथ सहायक कुलसचिव पंचम सनोड़िया, राकेश चडार, विज्ञान संकायाध्यक्ष डॉ. नीलम सिंह, कृषि विभाग के प्राध्यापक डॉ. चंदन सिंह एवं डॉ. शुभांशु शुक्ला सहित विश्वविद्यालय के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों को फसल उत्पादन की आधुनिक तकनीकें, मृदा की संरचना और गुणवत्ता, सिंचाई के विभिन्न तरीकों तथा स्थानीय किसानों द्वारा अपनाई जा रही कृषि प्रथाओं की विस्तृत जानकारी दी गई। विद्यार्थियों ने खेतों में जाकर फसलों की वृद्धि, रोग प्रबंधन और जल उपयोग के तरीकों को प्रत्यक्ष रूप से समझा, जिससे उनका आत्मविश्वास और व्यावहारिक समझ दोनों मजबूत हुई। इस अवसर पर कुलगुरु प्रो. डॉ. विनोद कुमार मिश्रा ने कहा, “खेत से प्रयोगशाला और प्रयोगशाला से फिर खेत—यही विकसित कृषि की सबसे बड़ी प्रयोगशाला है।”
उन्होंने किसानों को देश की जीवंत प्रयोगशाला बताते हुए विश्वविद्यालय और खेत के बीच निरंतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया। वहीं, कृषि विभाग के प्राध्यापक डॉ. चंदन सिंह ने इस भ्रमण को विद्यार्थियों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक और भविष्य उन्मुख बताते हुए कहा कि ऐसे शैक्षणिक दौरे विद्यार्थियों को कृषि क्षेत्र की वास्तविक चुनौतियों और संभावनाओं को समझने में मदद करते हैं। कुल मिलाकर यह भ्रमण विद्यार्थियों के लिए सीख, अनुभव और प्रेरणा का सशक्त माध्यम बना।