Sagar - कटरबाजी के खिलाफ अब युवा कांग्रेस का हल्ला बोल, थाना प्रभारियों को हटाने की मांग
सागर जिले में बिगड़ती कानून व्यवस्था, बढ़ते अपराध और नशीले पदार्थों के खुले कारोबार के खिलाफ जिला युवा कांग्रेस का गुस्सा अब सड़कों पर साफ नजर आने लगा है। शुक्रवार को भी युवा कांग्रेस ने जिले में पनप रहे अपराध, अवैध शराब, जुआ-सट्टा, नशीले पदार्थों और अनैतिक गतिविधियों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन करते हुए पुलिस प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया। जिला युवा कांग्रेस के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता तीन बत्ती गौर मूर्ति स्थित जिला शहर कांग्रेस कमेटी कार्यालय पर एकत्रित हुए। यहां से रैली के रूप में कार्यकर्ता सिटी कोतवाली स्थित नगर पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने जमकर नारेबाजी की और बिगड़ती कानून व्यवस्था के खिलाफ तीखा आक्रोश जताया।
कांग्रेस नेताओं ने पुलिस महानिदेशक के नाम 06 सूत्रीय ज्ञापन नगर पुलिस अधीक्षक ललित कश्यप को सौंपा। ज्ञापन में अवैध शराब, जुआ, सट्टा, नशीले पदार्थों और अनैतिक गतिविधियों को संरक्षण देने के आरोप लगाते हुए दोषी थाना प्रभारियों को तत्काल निलंबित करने और पूरे मामले की CBI से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई। इस दौरान मध्यप्रदेश शासन के पूर्व मंत्री सुरेन्द्र चौधरी ने पुलिस और प्रशासन पर जमकर निशाना साधते हुए कहा कि सागर जिले में कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और युवा नशे के दलदल में धकेले जा रहे हैं, जिसे कांग्रेस किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं करेगी।
शहर कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष महेश जाटव ने आरोप लगाया कि शहर के बीचों-बीच अवैध शराब की बिक्री और सट्टे की बुकिंग खुलेआम हो रही है। दिनदहाड़े कटरबाजी, चाकूबाजी और लूट की घटनाएं पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। युवा कांग्रेस जिला अध्यक्ष संदीप चौधरी ने साफ शब्दों में कहा कि जिले की बिगड़ती कानून व्यवस्था के खिलाफ युवा कांग्रेस का आंदोलन लगातार जारी रहेगा और जब तक दोषियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं होती, तब तक यह संघर्ष नहीं रुकेगा।
पूर्व विधायक सुनील जैन, एमपी कांग्रेस के पूर्व उपाध्यक्ष अमित रामजी दुबे सहित अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भी पुलिस प्रशासन पर अवैध कारोबारियों को संरक्षण देने के आरोप लगाए। कुल मिलाकर, सागर में अपराध और अवैध गतिविधियों के खिलाफ युवा कांग्रेस का आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। सवाल यही है—क्या प्रशासन इस चेतावनी को गंभीरता से लेगा या आंदोलन और तेज होगा?