Sagar - मेरिट में प्रथम, फिर भी नियुक्ति से वंचित ! दलित महिला को दो माह से नहीं मिला आंगनबाड़ी में नियुक्ति पत्र
सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और सामाजिक न्याय के दावों के बीच सागर जिले में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। सागर जिले के देवरी कला तहसील के सहजपुर सेक्टर अंतर्गत ग्राम मेहंदा में आंगनबाड़ी सहायिका भर्ती में प्रथम स्थान प्राप्त करने के बावजूद एक दलित महिला को अब तक नियुक्ति पत्र नहीं दिया गया है। पीड़ित महिला पिछले दो महीनों से न्याय के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर है। मेरिट लिस्ट में पहले नंबर पर नाम होने के बाद भी जब नौकरी न मिले, तो सवाल सिर्फ व्यवस्था पर नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय पर भी खड़े होते हैं। देवरी की रहने वाली संध्या मेहरा के साथ कुछ ऐसा ही हो रहा है।
दरअसल, ग्राम मेहंदा में आंगनबाड़ी सहायिका के रिक्त पद के लिए शासन द्वारा दोबारा आवेदन आमंत्रित किए गए थे। इस भर्ती प्रक्रिया में कुल 6 आवेदन प्राप्त हुए। मूल्यांकन के बाद 61.6 अंक हासिल कर संध्या मेहरा ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। इसके बावजूद परियोजना अधिकारी केसली ममता खटीक द्वारा पिछले करीब दो महीनों से उन्हें नियुक्ति पत्र जारी नहीं किया गया। न्याय की उम्मीद में पीड़ित महिला संध्या मेहरा ने क्षेत्रीय विधायक बृजबिहारी पटेरिया और सागर कलेक्टर से भी शिकायत की। दोनों स्तरों से उन्हें नियुक्ति दिलाने का आश्वासन मिला और केसली के अनुविभागीय अधिकारी को भी शिकायत पत्र भेजा गया। बावजूद इसके आज तक न तो नियुक्ति पत्र मिला और न ही कोई ठोस जवाब।
पीड़ित महिला का कहना है कि वह दलित समाज से आती है और इसी कारण उसे जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है। परिवार की आर्थिक स्थिति पहले ही कमजोर है और इस नियुक्ति से जीवन में कुछ स्थिरता आने की उम्मीद थी, लेकिन अब वह फिर से दर-दर भटकने को मजबूर है। यह मामला न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही, बल्कि सामाजिक संवेदनशीलता पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है। यदि मेरिट में प्रथम आने के बाद भी योग्य अभ्यर्थी को नियुक्ति न मिले, तो इससे सरकारी भर्तियों की विश्वसनीयता पर सीधा असर पड़ता है। पीड़ित परिवार ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द न्याय नहीं मिला, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।