सागर- डेम के गेट खराब, पानी बर्बाद, किसानों की फसल खतरे में, जल संसाधन विभाग की घोर लापरवाही !
मध्यप्रदेश के सागर जिले के शाहगढ़ क्षेत्र से जल संसाधन विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है, जहां तकनीकी खराबी के चलते क्षेत्र के दो प्रमुख सिंचाई डेम—बीला और चंदिया—के गेट समय पर बंद नहीं हो पाए। नतीजा यह है कि लाखों घनमीटर पानी व्यर्थ बह रहा है और हजारों किसानों की फसलें बर्बादी की कगार पर पहुंच गई हैं। शाहगढ़ क्षेत्र में सिंचाई के केवल दो ही बड़े संसाधन हैं—बीला डेम और चंदिया डेम। इसी वर्ष इन दोनों डेमों से पहली सिंचाई पूरी हुए लगभग 15 दिन हो चुके हैं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि अब तक दोनों डेमों के गेट पूरी तरह बंद नहीं किए जा सके। गेट खराब होने के कारण लगातार पानी बहता रहा, जिससे डेम आधे से ज्यादा खाली हो चुके हैं। चंदिया डेम तो पूरी तरह खाली होने की कगार पर पहुंच गया।
हालांकि बीती रात चंदिया डेम का गेट दुरुस्त किया गया, लेकिन तब तक अधिकांश पानी बह चुका था। चंदिया डेम से जुड़े करीब 10 किलोमीटर क्षेत्र में नहरें लगातार चलने से खेतों में पानी भर गया। अधिक नमी और रिसाव के कारण गेहूं की फसल पीली पड़ चुकी है और किसानों को भारी नुकसान का डर सता रहा है। बीला डेम की स्थिति भी कुछ अलग नहीं है। बीला डेम का पानी बीते दो दिनों से पिकअप वियर के जरिए सीधे नदी में बहता रहा। विडंबना यह है कि इतने बड़े बांध की निगरानी के लिए कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर मौजूद नहीं है। जो कर्मचारी पहले क्षेत्र में घूमकर निगरानी करते थे, उन्हें अब सागर कार्यालय में बैठा दिया गया है। कार्यपालन यंत्री की ओर से भी कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही।
अनुविभागीय अधिकारी से जब सवाल किए गए तो उन्होंने जिम्मेदारी ई-डैम सिस्टम पर डालते हुए कहा कि पानी की कोई बर्बादी नहीं हो रही है, जबकि हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। कठिन मौसम से पहले ही जूझ रहे शाहगढ़ क्षेत्र के किसान अब विभागीय लापरवाही से टूट चुके हैं। यदि समय रहते व्यवस्था नहीं सुधरी तो करीब 20 हजार किसान और लगभग 70 हजार एकड़ फसल बर्बादी की चपेट में आ सकती है। सवाल बड़ा है—अगर फसलें नष्ट होती हैं तो जिम्मेदार कौन होगा? विभाग या सरकार? और किसानों को मुआवजा कौन देगा? इन सवालों के जवाब का इंतजार आज अन्नदाता टकटकी लगाए कर रहा है।