Sagar- गेंहू में छिपा दुश्मन फसल पर पड़ रहा भारी, समय रहते कर ले उपाय नहीं तो पछताएंगे किसान
किसानों की मेहनत तब बेकार हो जाती है, जब खेत में फसल से पहले खरपतवार ताकत पकड़ लेते हैं. खासकर रबी सीजन में गेहूं की फसल के साथ उगने वाले खरपतवार किसानों के लिए बड़े सिरदर्द बन जाते हैं. ये खरपतवार न सिर्फ फसल की पैदावार रोकते हैं, बल्कि पोषक तत्व, पानी और धूप भी छीन लेते हैं. नतीजा ये होता है कि उत्पादन में सीधा 30 से 40 फीसदी तक नुकसान हो जाता है. सागर जिले में इन दिनों गेहूं की फसल में चौड़ी पत्ती और पतली पत्ती वाले खरपतवार बड़े पैमाने पर देखे जा रहे हैं. कई खेतों में तो दोनों तरह के खरपतवार एक साथ मौजूद हैं, जिससे नुकसान और भी ज्यादा बढ़ जाता है.
सागर के कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर के एस यादव बताते है कि चौड़ी पत्ती के खरपतवार में बथुआ, हिरनखुरी, कृष्णनील, मकोई, बड़ी दूधी जैसी घास शामिल होती है तो सकरी पत्ती चारा को गेहूं का मामा, गुल्ली डंडा, जंगली जई के रूप में जाना जाता है किसी-किसी के खेत में यह दोनों ही तरह के खरपतवार पाए जाते हैं
कम जमीन वाले किसान प्रयास करे वह अपने खेत से खरपतवार निकालने निंदाई गुणाई करवाए, साईकिल हेंड चलवाये, इसमें लागत कम होगी उपज अच्छी मिली है जो रासायनिक छिड़काव करना चाहते है वह चौड़ी पत्ती के खरपतवार के लिए मेटसल्फ्यूरॉन को 200 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें,
सकरी पत्ती के खरपतवार में क्लोडिनोफॉप-प्रोपार्जिल को 200 ग्राम प्रति एकड़ के हिसाब से डेढ़ सौ से 200 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव कर दें,
जिन किसानो के खेत में दोनों ही तरह के खरपतवार है वह कॉम्बो सल्फोसल्फ्यूरॉन का इस्तेमाल कर सकते है, दवा क सुबह या शाम में डालना सबसे अच्छा रहता है इसका असर अच्छा देखने को मिलता है,