मनचलों को छात्राओं ने सिखाया सबक लिया कानून हाथ में, बेटी बचाओ के नारे खोखले !
एक तरफ सरकार “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” का नारा जोर-शोर से लगाती नजर आती है, तो दूसरी तरफ जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। खासकर हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं और स्कूल जाने वाली बच्चियों की सुरक्षा को लेकर सवाल लगातार खड़े हो रहे हैं। बड़वानी जिले के अंजड से ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां मनचलों से परेशान छात्राओं का सब्र आखिरकार जवाब दे गया।
यह मामला मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले के अंजड के दशहरा मैदान का है। शासकीय जनजातीय सीनियर कन्या छात्रावास में रहने वाली छात्राएं रोजाना हॉस्टल से स्कूल और वापस आते-जाते समय मनचलों की छींटाकशी और भद्दे कमेंट का शिकार हो रही थीं। लगातार हो रही इस हरकत से करीब 55 छात्राएं मानसिक रूप से परेशान थीं।
छात्राओं ने इस पूरे मामले की जानकारी छात्रावास अधीक्षिका श्रीमती श्रुति बाला कर्मा को दी। अधीक्षिका ने तत्काल मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस को सूचित किया। आज सुबह एक मनचले को पकड़कर पुलिस के हवाले भी किया गया, लेकिन इसके बावजूद शाम के समय जब छात्राएं वापस छात्रावास लौट रही थीं, तब दशहरा मैदान के पास एक बार फिर वही युवक नजर आया।
इसके बाद छात्राओं का गुस्सा फूट पड़ा। शाम करीब 5 बजे, दशहरा मैदान पर छात्राओं ने मनचले को घेर लिया। अपने आत्मसम्मान और सुरक्षा के लिए खड़ी छात्राओं ने उसे पकड़कर धुनाई कर दी और फिर पुलिस के हवाले कर दिया। इस दौरान मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई और पूरा घटनाक्रम चर्चा का विषय बन गया।
इस घटना ने एक बार फिर प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बड़वानी जिला मुख्यालय पर पुलिस द्वारा निर्भया टीम का गठन किया गया है, लेकिन जिले के अन्य कस्बों और शहरों में बेटियों की सुरक्षा के लिए ऐसी कोई ठोस व्यवस्था नजर नहीं आती। समाजसेवियों द्वारा कई बार मांग उठाए जाने के बावजूद हालात जस के तस बने हुए हैं।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि पकड़ा गया मनचला बालिग है या नाबालिग। लेकिन यह घटना साफ संकेत देती है कि अगर समय रहते सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए, तो बेटियां खुद अपनी सुरक्षा के लिए आगे आने को मजबूर होंगी। सवाल यही है—क्या “बेटी बचाओ” सिर्फ नारा बनकर रह जाएगा, या हकीकत में बेटियों को सुरक्षित माहौल मिलेगा?