करणी सेना का जनक्रांति न्याय आंदोलन समाप्त, अब बनेगा राजनीतिक दल
एमपी के हरदा जिले में करणी सेना द्वारा 21 सूत्रीय मांगों को लेकर चलाया जा रहा जनक्रांति न्याय आंदोलन आज प्रशासनिक आश्वासन के बाद समाप्त कर दिया गया। आंदोलन के समापन के साथ ही करणी सेना ने एक बड़ा और चौंकाने वाला राजनीतिक ऐलान करते हुए साफ कर दिया है कि अब संगठन सिर्फ आंदोलन तक सीमित नहीं रहेगा,
बल्कि राजनीतिक दल बनाकर विधानसभा और लोकसभा चुनावों में अपने प्रतिनिधि उतारेगा। आंदोलन के दौरान जिला प्रशासन ने 21 मांगों में से एक मांग को तत्काल पूरा करते हुए पांच पुलिस कर्मियों को भोपाल स्थित PHQ भेजा, जबकि शेष 20 मांगों को राज्य और केंद्र सरकार के पास भोपाल और दिल्ली भेजने का आश्वासन दिया गया। इसी के बाद मंच से आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की गई।
मंच से करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीवन सिंह शेरपुर ने ऐलान करते हुए कहा कि सरकारें हर बार करणी समाज को सिर्फ आश्वासन देती हैं, लेकिन जमीन पर कुछ नहीं होता। उन्होंने कहा कि अब करणी सेना राजनीतिक ताकत बनेगी, ताकि समाज की आवाज सीधे विधानसभा और संसद तक पहुंचे। जल्द ही पार्टी का रजिस्ट्रेशन कराकर एक भव्य कार्यक्रम में राजनीतिक दल की औपचारिक घोषणा की जाएगी।
इस मौके पर करणी सेना में ऐतिहासिक एकीकरण भी देखने को मिला। क्षत्रिय करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष राज शेखावत, राजपूत करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराणा और राष्ट्रीय करणी सेना के अध्यक्ष जीवन सिंह शेरपुर को मंच पर एक साथ खड़ा कर पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरजपाल सिंह अम्मू ने संगठनात्मक एकता का संदेश दिया। इस एकीकरण के बाद तय किया गया कि अब महिपाल सिंह मकराणा राष्ट्रीय करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगे और उनके नेतृत्व में सभी करणी संगठन एकजुट होकर कार्य करेंगे।
करीब कई दिनों से जारी अनशन के बाद जीवन सिंह शेरपुर को जूस पिलाकर व्रत तुड़वाया गया, जिसके बाद समर्थकों में उत्साह देखने को मिला। आंदोलन स्थल पर बड़ी संख्या में करणी सेना के कार्यकर्ता और पदाधिकारी मौजूद रहे। करणी सेना के इस फैसले को प्रदेश की राजनीति में एक नए समीकरण के रूप में देखा जा रहा है। संगठन का दावा है कि आगामी चुनावों में यह राजनीतिक दल जनहित और समाज के अधिकारों की लड़ाई को निर्णायक मोड़ देगा।