Sagar- युवाओ के बहाने मंत्री पुत्र आकाश का शक्ति प्रदर्शन, भीड़ इतनी की बैठने तक जगह नहीं बची
सागर के पदमाकर सभागार में आकाश सिंह राजपूत का एक अलग ही जलवा दिखने को मिला, जहां युवाओ के महाधिवेशन के बहाने गजब का शक्ति प्रदर्शन देखने को मिला, आकाश के द्वारा युवाओ को संगठित करने युवा शक्ति संगठन का प्रथम आयोजन किया गया था, यह युवाओं पर आधारित यह कार्यक्रम राजनैतिक ना होते हुए भी भीड़ की वजह से चर्चा का विषय बन गया, जिसमे सैकड़ो की संख्या में युवा पहुंचे, भीड़ इतनी थी की अंदर पूरा सभागार ऊपर से नीचे तक हॉउस फुल था, अलग से लगाई गई चेयर भरी थी सभागार के बाहर लगे टेंट में बड़ी संख्या में युवा बैठकर एलईडी के माध्यम से कार्यक्रम से जुड़े हुए थे,
इस मंच पर ऐसे ऐसे युवा बैठे थे जिनके बारे में लोगो को कम जानकारी है लेकिन ये काम बड़े बड़े कारनामें कर चुके है, जिनकी चर्चा देशभर होती है, आकाश सिंह राजपूत ने इस ऐतिहासिक आयोजन को लेकर कहा भारत युवाओं का देश है इन युवाओं ने इतिहास बदला है इन्हीं युवाओं के बल पर मैं राष्ट्र सेवा करने के लिए निकला है युवा शक्ति संगठन राजनीति करने के लिए नहीं राष्ट्र सेवा करने के लिए बनाया है।
आकाश ने आगे कहा कि संगठन के मुख्य कार्यों में युवाओं को समाज से जोड़ना सामाजिक समरसता पर्यावरण अपनी धर्म संस्कृति के प्रति जागरूकता एवं सम्मान आपदा के समय युवाओं का अपने समाज के प्रति कर्तव्य जैसे रक्त दान, रोजगार, नवकरणी ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण कार्यों सहित राष्ट्रीय एकता स्वदेशी वस्तुओं का प्रचार प्रसार शिक्षा से लोगों को जोड़ना जैसे अनेक कार्य हमारा संगठन आप सभी के माध्यम से करेगा।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि सेंट्रल यूनिवर्सिटी डाॅ. हरिसिंह गौर के कुलपति वाय.एस.ठाकुर ने कहा कि डाॅ. गौर विदेशों में पढ़े और अपनी जन्म भूमि सागर लौटकर आये और उन्होंने यूनिवर्सिटी बनाई उसी तरह आकाश सिंह राजपूत भी गौर साहब के पद चिन्हों पर चल रहे हैं जो महानगरों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी अपनी मातृभूमि व अपने क्षेत्रवासियों के लिए कार्य करने के लिए राष्ट्र सेवा की सोच को लेकर युवाओं का यह संगठन खड़ा कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आकाश सिंह राजपूत फिल्मी हीरो नहीं रियल हीरों हैं जो युवाओं को एकत्रित कर समाज के उत्थान का बेड़ा उठाये हुये हैं। इस अवसर पर मंत्रि गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि जो व्यक्ति पेड़ लगाता है जरूरी नहीं कि उसके फल उसको खाने को मिले लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हम पेड़ लगाना छोड़ दें। आपके द्वारा किये गये समाजहित, राष्ट्रहित के कार्यों का लाभ भले ही आपको ना मिले लेकिन इससे आपकी आने वाली पीड़ी जरूर लाभांवित होगी और आपको याद करेगी